Saturday, 18 June 2016

दिल  के  दौरे  से  बचने  के  लिए  ये  उपाय

जरा  सोचिये  कि  शाम  के  7:25  बजे  है  और  आप  घर  जा  रहे  है  वो  भी  एकदम  अकेले ।
  
ऐसे  में  अचानक  से  आपके  सीने  में  तेज  दर्द  होता  है  जो  आपके  हाथों  से  होता  हुआ  आपके  जबड़ो  तक  पहुँच  जाता  है ।

आप  अपने  घर  से  सबसे  नजदीक  अस्पताल  से  5 मील  दूर  हैं  और  दुर्भाग्यवश  आपको  ये  नहीं  समझ  मे  आ  रहा  कि  आप  वहां  तक  पहुँच  पाएंगे  कि  नहीं ।

आप  सी पी आर  में  प्रशिक्षित  हैं  मगर  वहां  भी  आपको  ये  नहीं  सिखाया  गया कि  इसको  खुद  पर  प्रयोग कैसे  करें ।

ऐसे  में  दिल  के  दौरे  से  बचने  के  लिए  ये  उपाय  आजमाए :-

चूँकि  ज्यादातर  लोग  दिल  के  दौरे  के  वक्त  अकेले  होते  हैं  l

बिना  किसी  की  मदद  के  उन्हें  सांस  लेने  में  तकलीफ  होती  है ।

वे  बेहोश  होने  लगते  हैं  और  उनके  पास सिर्फ  10  सेकण्ड्स  होते  है ।

ऐसे  हालत  में  पीड़ित  जोर  जोर  से  खांस  कर  खुद  को  सामान्य  रख  सकता  है ।

एक  जोर  की   साँस लेनी  चाहिए  हर  खांसी  से  पहले  और  खांसी  इतनी  तेज  हो  कि  छाती  से  थूक  निकले ।
जब  तक  मदद  न  आये  ये  प्रक्रिया  दो  सेकंड  से  दोहराई  जाए  ताकि  धड्कन  सामान्य  हो  जाए ।

जोर  की  साँसे  फेफड़ो  में  ऑक्सीजन  पैदा  करती  हैं  और  जोर  की  खांसी  की  वजह  से  दिल  सिकुड़ता  है जिससे  रक्त संचालन  नियमित  रूप  से  चलता  है ।
जहाँ  तक  हो  सके  इस  सन्देश  को  हर  एक  तक  पहुंचाए ।

एक  ह्रदय  के  डॉक्टर  ने  तो  यहाँ  तक  कहा  कि  अगर  हर  व्यक्ति  यह  सन्देश  10  लोगो  को  भेजे  तो  एक जान  बचायी  जा  सकती  है ।
आप  सबसे  निवेदन  है  कि  चुटकले  भेजने  के  बजाय  यह  सन्देश  सबको  भेजे  ताकि  लोगों  की  जान  बच सके  ।

अगर  आपको  यह  सन्देश  बार  बार  मिले  तो  परेशान  होने  के  बजाय  आपको  खुश  होना  चाहिए  कि आपको  यह  बताने  वाले  बहुत  जन  है  कि  दिल  के  दौरे  से  कैसे  बचा  जाये ।

कृपया अपने सभी मित्रों से शेयर करना न भूलें।।

Thursday, 14 April 2016

हाथों से खाना खाने के फायदे


अधिकतर भारतीय अपने हाथों से खाना खाते हैं। लेकिन आजकल हमने पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करते हुए चम्मच और कांटे से खाना शुरू कर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने हाथों से खाना खाने के स्वास्थ्य से संबंधित कई फायदे हैं।
यह आपके प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है:
आयुर्वेद में कहा गया है की हम सब पांच तत्वों से बने हैं जिन्हें जीवन ऊर्जा भी कहते हैं, और ये पाँचों तत्व हमारे हाथ में मौजूद हैं ( आपका अंगूठा अग्नि का प्रतीक है, तर्जनी अंगुली हवा की प्रतीक है, मध्यमा अंगुली आकाश की प्रतीक है, अनामिका अंगुली पृथ्वी की प्रतीक है और सबसे छोटी अंगुली जल की प्रतीक है)। इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है।
जब हम हाथ से खाना खाते हैं तो हम अँगुलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं और यह जो मुद्रा है यह मुद्रा विज्ञान है, यह मुद्रा का ज्ञान है और इसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता निहित है। इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्वों को एक जुट करते हैं जिससे भोजन ज्यादा ऊर्जादायक बन जाता है और यह स्वास्थ्यप्रद बनकर हमारे प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है। भोजन में हरी मिर्च खाने से होते हैं अचूक स्‍वास्‍थ लाभ
इससे पाचन में सुधार होता है:
टच हमारे शरीर का सबसे मजबूत अक्सर इस्तेमाल होने वाला अनुभव है। जब हम हाथों से खाना खाते हैं तो हमारा मस्तिष्क हमारे पेट को यह संकेत देता है कि हम खाना खाने वाले हैं। इससे हमारा पेट इस भोजन को पचाने के लिए तैयार हो जाता है जिससे पाचन क्रिया सुधरती है।
इससे खाने पे दिमाग लगता है:
हाथ से खाना खाने में आपको खाने पर ध्यान देना पड़ता है। इसमें आपको खाने को देखना पड़ता है और जो आपके मुह में जा रहा है उस पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। इसे माइंडफुल ईटिंग भी कहते है और यह मशीन कि भांति चम्मच और कांटे से खाना खाने से ज्यादा स्वास्थयप्रद है। माइंडफुल ईटिंग के कई फायदे हैं इनमे से सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि इससे खाने के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं जिससे पाचन क्रिया सुधरती है और यह आपको स्वस्थ रखता है।
यह आपके मुह को जलने से बचाता है:
आपके हाथ एक अच्छे तापमान संवेदक का काम भी करते हैं। जब आप भोजन को छूते हैं तो आपको अंदाजा लग जाता है कि यह कितना गर्म है और यदि यह ज्यादा गर्म होता है तो आप इसे मुह में नहीं लेते हैं। इस प्रकार यह आपकी जीभ को जलने से बचाता है।
अमीर कौन

6 माह के बच्चे की माँ ने 3 स्टार होटल मैनेजर से पूछा.....!!. 

सर एक कप दूध मिलेगा क्या ??

मैनेजर "हाँ, 100 रू.मेँ मिलेगा".......!!

"ठीक ...है दे दो" महिला ने कहा.....

जो पिकनिक के दौरान इस होटल मेँ ठहरी, सुबह जब गाड़ी मे जा रहे थे तो बच्चे को फिर भूख लगी,गाडी को टूटी झोपड़ी वाली पुरानी सी चाय की दुकान पर रोका…… 

बच्चे को दूध पिला कर शांत किया.........!

दूध के पैसे पूछने पर बूढा दुकान मालिक बोला - "बेटी हम बच्चे के दूधके पैसे नहीं लेते, यदि रास्ते के लिए चाहिए तो लेती जाओ!."बच्चे की माँ के दिमाग मे एक सवाल बार बार घूम रहा था कि अमीर कौन ??

3 स्टार होटल वाला,या टूटी झोपड़ी वाला ??

मिली थी जिन्दगी किसी के 'काम' आने के लिए..पर वक्त बित रहा है कागज के टुकड़े कमाने के लिए..क्या करोगे इतना पैसा कमा कर..?

ना कफन मे 'जेब' है ना कब्र मे 'अलमारी..'और 
ये मौत के फ़रिश्ते तो 'रिश्वत'भी नही लेते....
यह पोस्ट जो दिल को छू गई है......


रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले लड़के की नजरें अचानक एक बुजुर्ग दंपति पर पड़ी।
उसने देखा कि वो बुजुर्ग पति अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उसे सहारा देते हुए चल रहा था ।

थोड़ी दूर जाकर वो दंपति एक खाली जगह देखकर बैठ गए ।
कपड़ो के पहनावे से वो गरीब ही लग रहे थे ।

तभी ट्रेन के आने के संकेत हुए और वो चाय वाला अपने काम में लग गया।
शाम में जब वो चाय वाला वापिस स्टेशन पर आया तो देखाकि वो बुजुर्ग दंपति अभी भी उसी जगह बैठे हुए है ।

वो उन्हें देखकर कुछ सोच में पड़ गया ।
देर रात तक जब चाय वाले ने उन बुजुर्ग दंपति को उसी जगह पर देखा तो वो उनके पास गया और उनसे पूछने लगा: बाबा आप सुबह से यहाँ क्या कर रहे है ?
आपको जाना कहाँ है ?

बुजुर्ग पति ने अपना जेब से कागज का एक टुकड़ा निकालकर चाय वाले को दिया और कहा: बेटा हम दोनों में से किसी को पढ़ना नहीं आता,इस कागज में मेरे बड़े बेटे का पता लिखा हुआ है ।
मेरे छोटे बेटे ने कहा था कि अगर भैया आपको लेने ना आ पाये तो किसी को भी ये पता बता देना, आपको सही जगह पहुँचा देगा ।

चाय वाले ने उत्सुकतावश जब वो कागज खोला तो उसके होश उड़ गये । उसकी आँखों से एकाएक आंसूओं की धारा बहने लगी ।

उस कागज में लिखा था कि.........
"कृपया इन दोनों को आपके शहर के किसी वृध्दाश्रम में
भर्ती करा दीजिए, बहुत बहुत मेहरबानी होगी..."
दोस्तों !  धिक्कार है ऐसी संतान पर, इसके बजाय तो बाँझ रह जाना अच्छा होता है !
इसको इतना शेयर करो कि कोई भी माता पिता को वर्द्धाआश्रम में न भर्ती कराये .....
सुन्दर प्रसंग

महाभारत का युद्ध चल रहा था -
एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर “भीष्म पितामह” घोषणाकर देते हैं कि -
“ मैं कल पांडवों का बध कर दूँगा ”
उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई -
भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|
तब श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो -
श्री कृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए -
शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो -
द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने -
“अखंड सौभाग्यवती भव” का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!
“बत्सा तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो. क्या तुमको श्री कृष्ण यहाँ लेकर आये है” ?
तब द्रोपदी ने कहा कि -
“हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं” तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दुसरे से प्रणाम किया -
भीष्म ने कहा - “मेरे एक बचन को मेरे ही दूसरे बचन से काट देने का काम श्री कृष्ण ही कर सकते है”
शिविर से वापस लौटते समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि -
“तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है ” -
“ अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, ध्रतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन- दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती, तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती ” -
……तात्पर्य्……
वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्याए हैं उनका भी मूल कारण यही है कि -
“ जाने अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है ”
“ यदि घर के बच्चे और बहुएँ प्रतिदिन घर के सभी बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें तो, शायद किसी भी घर में कभी कोई क्लेश न हो ”
बड़ों के दिए आशीर्वाद कवच की तरह काम करते हैं उनको कोई “अस्त्र-शस्त्र” नहीं भेद सकता 

Wednesday, 13 April 2016

गैस एसिडिटी व कब्ज का स्थायी उपचार





Pawan Mukta Asana- पवन-मुक्त आसन- पवन (Gas) मुक्त (release) आसन  अर्थात दूषित वायु को शरीर से निष्कासित करता है।
 विधि- सर्वप्रथम चित लेट जायें (शवासन में)। पैरो को पास ,हाथों को शरीर के बराबर में  ज़मीन पर रख लें ,धीरे से दायें पैर को घुटने से मोड़कर ,दोनो हाथो की उंगलियों को आपस में फसांते हुए दाएँ घुटने के नीचे से पैर को थामिये अब ठोड़ी को घुटने से लगाइए फिर सिर को वापिस पीछे रखते हुए पैर को भी सीधा कर लीजिए।
 ठीक इसी तरह बायें पैर से भी दोहराईए। 4-5 बार दोनो तरफ से दोहराएँगे।
साँस निर्देश-  साँस लेते हुए पैर को  थामिये और साँस को निकलते हुए ठोड़ी को घुटने से लगाइए।
इसी आसन को दोनो पैरों से ठीक इसी तरह दोहराएँगे।
सावधा‍नी- कमर दर्द के रोगी गर्दन को नही उठाएँगे ,केवल पैर को ही पेट से लगाएँगे।
लाभ-क़ब्ज़ के लिए लाभदायक ।वायु विकार में चमत्कारिक लाभ।,पाचन तंत्र को मजबूत करता है ।पेट की चर्बी को कम करता है ।घुटनो में लाभ देता है। स्त्री रोगों में  भी लाभप्रद।

Tuesday, 12 April 2016

आइये कुछ नया जानें :
क्रति = सैकन्ड का 34000वाँ भाग
1 त्रुति = सैकन्ड का 300वाँ भाग
2 त्रुति = 1 लव
1 लव = 1 क्षण
30 क्षण = 1 विपल
60 विपल = 1 पल
60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट )
2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा)
24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार)
7 दिवस = 1 सप्ताह
4 सप्ताह = 1 माह
2 माह = 1 ऋतु
6 ऋतु = 1 वर्ष
100 वर्ष = 1 शताब्दी
10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी
432 सहस्राब्दी = 1 युग
2 युग = 1 द्वापर युग
3 युग = 1 त्रेता युग
4 युग = सतयुग
1 महायुग = सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग
76 महायुग = मनवन्तर
1000 महायुग = 1 कल्प
1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ)
1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प (देवों का अन्त और जन्म)
1 महाकाल = 730 कल्प
(ब्रह्मा का अन्त और जन्म)
तनिक ध्यान दीजिये।
हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है।

Wednesday, 6 April 2016

सृष्टि उत्पत्ति

ज्योतिष में एक सूर्यद्धांत नामक ग्रंथ है । जिसके अनुसार सृष्टि की आयु को 1000 महायुग में विभाजित किया गया है ।
1 सत्युग = 1728000 वर्ष
1 त्रेतायुग = 1296000 वर्ष
1 द्वापरयुग = 864000 वर्ष
1 कलियुग = 432000 वर्ष

इन चारों को मिलाकर बनता है एक महायुग जिसमें कुल वर्ष हैं 4320000 वर्ष ।
सृष्टि की आयु गीता, अथर्ववेद और सूर्यसिद्धान्त में है 1000 महायुग जिसे एक कल्प कहा जाता है ।
1 कल्प = 1 ब्रह्मदिन = 1000 महायुग = 1000 x 4320000 वर्ष = 4320000000 वर्ष
998 महायुग को विभाजित किया है 14 भागों में । जिनको मनु कहा जाता है ।
1 मनु = 71 महायुग = 71 × 4320000 वर्ष = 306720000 वर्ष
तो ऐसे अब तक 6 मनु पूरे बीत चुके हैं । और सातवें मनु का 28 वाँ महायुग का कलियुग का 5115 वाँ वर्ष चल रहा है ।
6 मनु = 6 x 306720000 वर्ष = 1840320000 वर्ष
27 महायुग = 27 x 4320000 वर्ष = 116640000 वर्ष
1 सत्युग = 1728000 वर्ष
1 त्रेतायुग = 1296000 वर्ष
1 द्वापरयुग = 864000 वर्ष
कलियुग के 5115 वर्ष

इनको जोड़कर हुआ है = 1960853115 वर्ष
1000 महायुगों में से जो पहले दो महायुग हैं उसमें पृथिवी ठंडी हुई है । बाद में मानव पृथिवी पर आया है । 
हिमालय पर्वत पर ज्ञान ईश्वर ने दिया है । क्योंकि तब हिमालय की ऊँचाई जल स्तर से कम थी और द्वीप डूबे हुए थे ।
समय के साथ साथ द्वीप ऊपर आते गए तो मानव हिमालय से प्रस्थान करता हुआ बाकी के भूखंड में बसने लगा और देश बसने लगे ।
बहाने Vs सफलता 

1- मुझे उचित शिक्षा लेने का अवसर नही मिला…
उचित शिक्षा का अवसर  फोर्ड मोटर्स के मालिक  हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।
2- मै इतनी बार हार चूका,  अब हिम्मत नही…
अब्राहम लिंकन 15 बार चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।
3- मै अत्यंत गरीब घर से हूँ …
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी  गरीब घर से थे ।
4- बचपन से ही अस्वस्थ था…
आँस्कर विजेता अभिनेत्री मरली मेटलिन भी बचपन से बहरी व अस्वस्थ थी ।
5 - मैने साइकिल पर घूमकर आधी ज़िंदगी गुजारी है…
निरमा के करसन भाई पटेल ने भी साइकिल पर निरमा बेचकर आधी ज़िंदगी गुजारी ।
6- एक दुर्घटना मे अपाहिज होने के बाद मेरी हिम्मत चली गयी…
प्रख्यात नृत्यांगना सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।
7- मुझे बचपन से मंद बुद्धि  कहा जाता है…
थामस अल्वा एडीसन को भी बचपन से मंदबुद्धि कहा जता था।
8- बचपन मे ही मेरे पिता का देहाँत हो गया था…
प्रख्यात संगीतकार ए.आर.रहमान के पिता का भी  देहांत बचपन मे हो गया था।
9- मुझे बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी…
लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी।
10- मेरी लंबाई बहुत कम है…
सचिन तेंदुलकर की भी लंबाई कम है।
11- मै एक छोटी सी नौकरी करता हूँ , इससे क्या होगा… 
धीरु अंबानी भी छोटी नौकरी करते थे।
12- मेरी कम्पनी एक बार दिवालिया हो चुकी है , अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा…
दुनिया की सबसे बङी शीतल पेय निर्माता पेप्सी कोला भी दो बार दिवालिया हो चुकी है ।
13- मेरा दो बार नर्वस ब्रेकडाउन हो चुका है, अब क्या कर पाउँगा…
डिज्नीलैंड बनाने के पहले वाल्ट डिज्नी का तीन बार नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था।
14- मेरी उम्र बहुत ज्यादा है…
विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन के मालिक ने 60 साल की उम्र मे पहला रेस्तरा खोला था।
15- मेरे पास बहुमूल्य आइडिया है  पर लोग अस्वीकार कर देते है…
जेराँक्स फोटो कापी मशीन के आईडिया को भी ढेरो कंपनियो ने अस्वीकार किया था पर आज परिणाम सामने है ।
16- मेरे पास धन नही… 
इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था  उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे।
17- मुझे ढेरो बीमारियां है..
वर्जिन एयरलाइंस के प्रमुख भी अनेको बीमारियो मे थे |  राष्ट्रपति रुजवेल्ट के दोनो पैर काम नही करते थे।
आज आप जहाँ भी है  या कल जहाँ भी होगे  इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार नही ठहरा सकते , इसलिए आज चुनाव करिये - सफलता और सपने चाहिए या खोखले बहाने …
King's curiosity - राजा की जिज्ञासा
एक बार एक राजा ने विद्वान ज्योतिषियों और ज्योतिष प्रेमियों की सभा बुलाकर प्रश्न किया कि “मेरी जन्म पत्रिका के अनुसार मेरा राजा बनने का योग था मैं राजा बना , किन्तु उसी घड़ी मुहूर्त में अनेक जातकों ने जन्म लिया होगा जो राजा नहीं बन सके क्यों ? इसका क्या कारण है ?
राजा के इस प्रश्न से सब निरुत्तर होगये. क्या जबाब दें कि एक ही घड़ी मुहूर्त में जन्म लेने पर भी सबके भाग्य अलग अलग क्यों हैं । सब सोच में पड़ गये ।
अचानक एक वृद्ध खड़े हुये और बोले महाराज की जय हो ! आपके प्रश्न का उत्तर भला कौन दे सकता है , आप यहाँ से कुछ दूर घने जंगल में यदि जाएँ तो वहां पर आपको एक महात्मा मिलेंगे उनसे आपको उत्तर मिल सकता है । राजा की जिज्ञासा बढ़ी और घोर जंगल में जाकर देखा कि एक महात्मा आग के ढेर के पास बैठ कर अंगार (गरमा गरम कोयला ) खाने में व्यस्त हैं , सहमे हुए राजा ने महात्मा से जैसे ही प्रश्न पूछा महात्मा ने क्रोधित होकर कहा "तेरे प्रश्न का उत्तर देने के लिए मेरे पास समय नहीं है मैं भूख से पीड़ित हूँ ।तेरे प्रश्न का उत्तर यहां से कुछ आगे पहाड़ियों के बीच एक और महात्मा हैं
वे दे सकते हैं ।
राजा की जिज्ञासा और बढ़ गयी, पुनः अंधकार और पहाड़ी मार्ग पार कर बड़ी कठिनाइयों से राजा दूसरे महात्मा के पास पहुंचा किन्तु यह क्या महात्मा को देखकर राजा हक्का बक्का रह गया ,दृश्य ही कुछ ऐसा था, वे महात्मा अपना ही माँस चिमटे से नोच नोच कर खा रहे थे । राजा को देखते ही महात्मा ने भी डांटते हुए कहा ” मैं भूख से बेचैन हूँ मेरे पास इतना समय नहीं है , आगे जाओ पहाड़ियों के उस पार एक आदिवासी गाँव में एक बालक जन्म लेने वाला है ,जो कुछ ही देर तक जिन्दा रहेगा सूर्योदय से पूर्व वहाँ पहुँचो वह बालक तेरे प्रश्न का उत्तर का दे सकता है.
सुन कर राजा बड़ा बेचैन हुआ बड़ी अजब पहेली बन गया मेरा प्रश्न, उत्सुकता प्रबल थी कुछ भी हो यहाँ तक पहुँच चुका हूँ वहाँ भी जाकर देखता हूँ क्या होता है । राजा पुनः कठिन मार्ग पार कर किसी तरह प्रातः होने तक उस गाँव में पहुंचा, गाँव में पता किया और उस दंपति के घर पहुंचकर सारी बात कही और शीघ्रता से बच्चा लाने को कहा जैसे ही बच्चा हुआ दम्पत्ति ने नाल सहित बालक राजा के सम्मुख उपस्थित किया । राजा को देखते ही बालक ने हँसते हुए कहा राजन् ! मेरे पास भी समय नहीं है, किन्तु अपना उत्तर सुनो लो तुम,मैं और दोनों महात्मा पूर्व जन्म में हम चारों भाई व राजकुमार थे । एकबार शिकार खेलते खेलते हम जंगल में भटक गए। तीन दिन तक भूखे प्यासे भटकते रहे । अचानक हम चारों भाइयों को आटे की एक पोटली मिली जैसे तैसे हमने चार बाटी सेकीं और अपनी अपनी बाटी लेकर खाने बैठे ही थे कि भूख प्यास से तड़पते हुए एक महात्मा आ गये । अंगार खाने वाले भइया से उन्होंने कहा “बेटा मैं दस दिन से भूखा हूँ अपनी बाटी में से मुझे भी कुछ दे दो , मुझ पर दया करो जिससे मेरा भी जीवन बच जाय, इस घोर जंगल से पार निकलने की मुझमें भी कुछ सामर्थ्य आ जायेगी इतना सुनते ही भइया गुस्से से भड़क उठे और बोले "तुम्हें दे दूंगा तो मैं क्या आग खाऊंगा ? चलो भागो यहां से।
वे महात्मा जी फिर मांस खाने वाले भइया के निकट आये उनसे भी अपनी बात कही किन्तु उन भइया ने भी महात्मा से गुस्से में आकर कहा कि "बड़ी मुश्किल से प्राप्त ये बाटी तुम्हें दे दूंगा तो मैं क्या अपना मांस नोचकर खाऊंगा ?
भूख से लाचार वे महात्मा मेरे पास भी आये, मुझसे भी बाटी मांगी तथा दया करने को कहा किन्तु मैंने भी भूख में धैर्य खोकर कह दिया कि "चलो आगे बढ़ो मैं क्या भूखा मरुँ ?”
बालक बोला “अंतिम आशा लिये वो महात्मा हे राजन !आपके पास आये , आपसे भी दया की याचना की, सुनते ही आपने उनकी दशा पर दया करते हुये ख़ुशी से अपनी बाटी में से आधी बाटी आदर सहित उन महात्मा को दे दी ।
बाटी पाकर महात्मा बड़े खुश हुए और जाते हुए बोले "तुम्हारा भविष्य तुम्हारे कर्म और व्यवहार से फलेगा ”
बालक ने कहा “इस प्रकार हे राजन ! उस घटना के आधार पर हम अपना भोग, भोग रहे हैं , धरती पर एक समय में अनेकों फूल खिलते हैं, किन्तु सबके फल रूप, गुण, आकार-प्रकार, स्वाद में भिन्न होते हैं ”
इतना कहकर वह बालक मर गया। राजा अपने महल में पहुंचा और माना कि ज्योतिष शास्त्र, कर्तव्य शास्त्र और व्यवहार शास्त्र है । एक ही मुहूर्त में अनेकों जातक जन्मते हैं किन्तु सब अपना किया, दिया, लिया ही पाते हैं ।
जैसा भोग भोगना होगा वैसे ही योग बनेंगे । जैसा योग होगा वैसा ही भोग भोगना पड़ेगा यही जीवन चक्र ज्योतिष शास्त्र समझाता है।
एसिडिटी की दवा से हो सकती है आपकी किडनी खराब।

जब हम खाना खाते हैं तो इस को पचाने के लिए शरीर में एसिड बनता हैं। जिस की मदद से ये भोजन आसानी से पांच जाता हैं। ये ज़रूरी भी हैं। मगर कभी कभी ये एसिड इतना ज़्यादा मात्रा में बनता हैं के इसकी वजह से सर दर्द, सीने में जलन और पेट में अलसर और अलसर के बाद कैंसर तक होने की सम्भावना हो जाती हैं।
ऐसे में हम नियमित ही घर में इनो या पीपीआई (प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स) दवा का सेवन करते रहते हैं। मगर आपको जान कर आश्चर्य होगा के ये दवाये सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं। पीपीआई ब्लड में मैग्नीशियम की कमी कर देता है। अगर खून पर असर पड़ रहा है तो किडनी पर असर पड़ना लाज़मी है। जिसका सीधा सा अर्थ की ये दवाये हमारी सेहत के लिए खतरनाक हैं। हमने कई ऐसे मूर्ख लोग भी देखे हैं जो एसिडिटी होने पर कोल्ड ड्रिंक पेप्सी या कोका कोला पीते हैं ये सोच कर के इस से एसिडिटी कंट्रोल होगा। ऐसे लोगो को भगवान ही बचा सकता हैं।
तो ऐसी स्थिति में कैसे करे इस एसिडिटी का इलाज।
आज हम आपको बता रहे हैं भयंकर से भयंकर एसिडिटी का चुटकी बजाते आसान सा इलाज। ये इलाज आपकी सोच से कई गुना ज़्यादा कारगार हैं। तो क्या हैं ये उपचार। ये हर रसोई की शान हैं। हर नमकीन पकवान इसके बिना अधूरा हैं। ये हैं आपकी रसोई में मौजूद जीरा। जी हाँ जीरा।
कैसे करे सेवन।
जब भी आपको एसिडिटी हो जाए कितने भी भयंकर से भयंकर एसिडिटी हो आपको बस जीरा कच्चा ही चबा चबा कर खाना हैं। एसिडिटी के हिसाब से आधे से एक चम्मच (ढाई से पांच ग्राम) जीरा खाए। इसके 10 मिनट बाद गुनगुना पानी पी ले। आप देखेंगे के आपकी समस्या ऐसे गायब हो गयी जैसे गधे के सर से सींग।

ये उपरोक्त नुस्खा मैंने बहुत लोगो पर आजमाया हैं। और उनका अनुभव ऐसा हैं के जैसे जादू।

कारगर ओषधियाँ
(1) अनेक रोगों की एक दवा:-हींग १० ग्राम,नौशादर १० ग्राम,सेंधा नमक १० ग्राम-सबको ६०० ग्राम पानी में खरल करें।जब सब दवाएं पानी में मिलकर एक हो जाएँ तब बोतल में भर लें।२५-२५ ग्राम दवा प्रातः सांय पिलायें।
यह योग दर्द-गुर्दा,तिल्ली,जिगर का वरम,वायुगोला,बदहज्मी,भूख न लगना आदि रोगों की शर्तिया दवा है।

(2) अर्श (बवासीर )के मस्से:-जब भी पेशाब करने जाएँ,अपना मूत्र अन्जलि में भरकर मस्सों को धो लिया करें।दो मास तक ऐसा करने से बवासीर के रोग से सदा के लिए छुट्टी हो जाएगी।
(3) आँख का दर्द:-सूर्योदय के पूर्व आँखों में बरगद(बड़) का दूध डालें।दर्द तुरन्त मिट जायेगा।
नोट-बड़ का दूध सूर्योदय से पूर्व ही अच्छा निकलता है।एक पत्ते से २-३ बूंद प्राप्त हो जाता है।

(4) सुबह उठते ही अपना बासी थूक आँखों में लगाने से आँखों की रोशनी बढ़ती है,और जाला,धून्धलापन मिटता है।बशर्ते कि दांतों में पायरिया आदि रोग न हों। तभी कारगर है।
(5) आँख के अनेक रोगों पर:-यदि आँखों में दर्द,खुजली,जाला,लाली हो,मोतिया उतरना आरम्भ हो गया हो तो प्रतिदिन प्रातः गाय का ताजा मूत्र २-३ बूंद चालिस दिन तक आँख में डालें।मोतियाबिन्द बिना आपरेशन के कट जाता है।शर्तिया दवा है।
(6) आग से जलना:-यदि कोई अंग आग से जल जाये तो उसी समय जले स्थान पर ग्लिसरीन लगा दें।जले के लिए अचूक एवं अद्भूत दवा है।न दर्द होगा,न छाले पड़ेगे और न चमड़ी ही लाल होगी।
(7) आधासीसी:- १.जिस और दर्द हो उस और के कान में कागजी नींबू का रस की ३-४ बूंदे डाल दो।दर्द तुरन्त मिट जाता है।
२.कालीमिर्च पानी में घिसकर जिस और दर्द हो,उससे उल्टी आँख में लगा दें।यह दवा लगेगी तो बहुत,परन्तु आधासीसी का दर्द एक ही बार में भाग जायेगा और फिर कभी नहीं होगा।

(8) एक वर्ष के लिए तन्दुरुस्ती का बीमा:-कालीमिर्च,नीम के पत्ते और बीजरहित लालमिर्च,सबको बराबर लेकर घोट-पीसकर ६-६ ग्राम की गोलियाँ बना लें।शौच,स्नान और दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर प्रतिदिन प्रातः निराहार १-१ गोली पानी के साथ चैत्र सुदी १ से १५ दिन तक खाएँ।एक वर्ष तक कोई रोग नहीं होगा।
(9) हरड़ अमृत समान:-प्रतिदिन २-३ छोटी हरड़ चूसने से पेट के सब विकार दूर हो जाते हैं,कब्ज दूर होती है,भूख खूब बढ़ती है,पाचनशक्ति बढ़ जाती है,रक्त शुद्ध हो जाता है,आँखों के लिए भी लाभप्रद है।निरन्तर सेवन से चश्में का नम्बर भी घट जाता है।
(10) क्षय(टी.वी.) नाशक:-स्वस्थ एवं दुधारु काली गाय का मूत्र दिन में २०-२० ग्राम पिलाएँ।यह प्रयोग २१ दिन तक करें।

(11) खाँसी:-
१.दिन में तीन चार बार २०-२० ग्राम बढ़िया बूरा फाँकने से खाँसी ठीक हो जाती है।
नोट–बूरा फाँकने से २ घण्टा पूर्व और एक घण्टा पश्चात् जल न पीएँ।रात्रि में भोजन न करें।जल भी न पीएँ।यदि प्यास लगे तो गर्म दूध या तुलसी के पत्तों की चाय लें।
२.तुलसी के पत्ते १५,कालीमिर्च ९,इन दोनों की चाय बनाकर पीने से खाँसी,जुकाम,बुखार,कफ-विकार,मन्दाग्नि आदि रोग दूर हो जाते हैं।
३.फिटकरी भुनी हुई १० ग्राम,खाँड देशी १० ग्राम दोनों को बारीक पीसकर १४ पुड़िया बना लें।सूखी खाँसीवाले को दूध से और आर्द्र (गीली)खाँसी वाले को जल से खिलाएँ।इससे पुरानी से पुरानी खाँसी और साधारण दमा भी दूर हो जाता है।
४.बार-बार शीशा देखने से भी खाँसी में बहुत लाभ होता है।

(12) गर्भरक्षा:-जिस स्त्री को बार-बार गर्भपात हो जाता हो उसकी कमर में धतूरे की जड़ बाँध दें।इससे गर्भपात नहीं होगा।जब नौ मास पूरे हो जाएँ तब जड़ खोल दें।
(13) गर्भस्थापक:-
१.अपामार्ग की जड़ का चूर्ण ३० ग्राम,कालीमिर्च २१ दोनों को बारीक पीस लें।मासिकधर्म के एक सप्ताह पूर्व से ऋतु के तीसरे दिन तक दें।भोजन में केवल दूध और चावल का प्रयोग करें।तीन मास तक ब्रह्मचर्य का पालन करें।इससे गर्भाशय के सारे रोग दूर हो जाते हैं,मासिक नियमित हो जाता है।प्रदर एवं बन्धयत्व को दूर करने वाली महौषधि है।
२.ऋतुकाल में चारों दिन २५ ग्राम अजवायन और २५ ग्राम मिश्री को २५ ग्राम पानी में रात्रि में मिट्टी के बर्तन में भिगो दें।प्रातः ठण्डाई की भाँति खूब पीसकर पी जाएँ।
पथ्य में मूँग की दाल और रोटी (बिना नमक की) लें।आठ दिन दवा का सेवन करें।अवश्य गर्भ रहेगा।

(14) दन्तमंजन:-दालचीनी,कालीमिर्च,धनिया भूना हुआ,नीलाथोथा भूना हुआ,कपूरकचरी,सेंधानमक,मस्तगी और चोबचीनी–प्रत्येक १० ग्राम।पपड़ियाकत्था २० ग्राम,माजूफल ५ नग।सबको कूट-पीसकर मंजन बना लें।
इस मंजन का प्रयोग करने से दन्तरोग तो दूर होंगे ही,बाल जीवनभर सफेद नहीं होंगे।

(15) दन्त-रोग:-
१.लौंग १० ग्राम,कपूर १ ग्राम।-दोनों को बारीक पीसकर दांतों पर मलने से दाँतों के सब रोग और दर्द आदि नष्ट हो जाते हैं।
२.मौलश्री की दातुन करने से हिलते हुए दाँत दृढ़ हो जाते हैं,पायोरिया दूर होता है।मौलश्री में दन्तरोगों को दूर करने की अदभूत शक्ति है।
आयुर्वेद के ग्रन्थों में लिखा है-‘दन्ता भवन्ति चपलापि च वज्रतुल्या।'दाँत मोती जैसे श्वेत और व्रज के समान दृढ़ हो जाते हैं।

(16) दमा की अद्भूत दवा:-धतूरे का १-१ बीज ८ दिन तक प्रातः पानी से निगल लें।दूसरे सप्ताह २-२ बीज लें।इसी प्रकार प्रति सप्ताह एक -एक बीज बढ़ाते हुए पाँचवें सप्ताह ५-५ बीज प्रतिदिन लें।दमा कितना भी पुराना हो मिट जायेगा।
(17) दर्दमात्र की दवा:-सोडाबाईकार्ब ३ ग्राम,फिटकरी सफेद कच्ची ३ ग्राम।
दोनों को बारीक पीस लें।यह एक मात्रा है।दवा फाँककर ऊपर से गर्म पानी पी लें।एक ही मात्रा से सब प्रकार के दर्द भाग जाते हैं।

(18) दांतों का हिलना:-बड़ की दातुन करें।वटवृक्ष की दातुन हिलते हुए दाँतों को जमाने की सर्वश्रेष्ठ ओषधि है।इसके प्रयोग से दाँतों का आगे के लिए विकृत होना बन्द हो जाता है।
२.शौच करते समय दाँतों को भींचकर रखने से (दबाकर रखने से) दांत जिन्दगी भर नहीं हिलेंगे।

(19) निर्मली के बीज १४० दानें मिट्टी के बर्तन में भिगो दें।पाँचवें दिन से दो दानें प्रातः व २ दानें सांय मिश्री मिले हुए ठण्ड़े दूध से लें।
ये बीज कब्ज को दूर करते हैं,बल बढ़ाते हैं।वात,पित्त और कफ के तमाम रोगों को जीतते हैं।परखने पर स्वर्ण भस्म के तुल्य प्रतीत होंगे।
प्रमेह और प्रदर की अचूक दवा है।
नोट-पानी को प्रतिदिन बदलते रहें।
गुड़,तेल,मिर्च,खटाई,छाछ,खीर एवं उडद की दाल का परहेज करें।

(20) पथरी:-
१.नीम के पत्तों की राख ६ ग्राम फाँककर ऊपर से पानी पीएँ।कुछ दिन के प्रयोग से पथरी गल जाती है।
२.प्रतिदिन प्रातः गोमूत्र ५० ग्राम पीएँ और सांय तीन ग्राम फिटकरी एक गिलास पानी में घोलकर पीएं।४० दिन सेवन करें।पथरी गलकर निकल जायेगी।परीक्षित है।

(21) शक्ति का खजाना:-
१.असगन्ध का चूर्ण ६ ग्राम फाँककर ऊपर से दूध पीने से शरीर पुष्ट व बल की वृद्धि होती है।

२.भाँगरे का चूर्ण १०० ग्राम,काले तिल का चूर्ण २०० ग्राम,आँवला चूर्ण २०० ग्राम-तीनों को कूट-पीसकर कपड़छन कर लें,फिर उसमें ५०० ग्राम मिश्री मिला लें और घी के चिकने बर्तन में सुरक्षित रक्खें।
१०-१० ग्राम दवा प्रातः-साँय गोदुग्ध के साथ सेवन करें।
इसके सेवन से रोग नहीं सताते।बाल काले होते हैं,बल और शक्ति की अपूर्व वृद्धि होती है।अकालमृत्यु और वृद्धावस्था का विषेश भय नहीं रहता।

३.रात्रि में छोटी पीपल ,पानी में भिगो दें।प्रातः घोट-पीसकर मधु से चाटें,ऊपर से गोदुग्ध पीएँ।इससे ज्वर,खाँसी,अशक्ति नष्ट होकर बल और शक्ति बढ़ेगी।कम से कम ४० दिन सेवन करें।
(22) आरोग्याम्बु:-एक लीटर पानी को ओटाने से २५० ग्रिम रह जाए तो इसे आरोग्याम्बु कहते हैं।इसे पीने से खाँसी,दमा और कफ के रोग दूर होते हैं।बुखार शीघ्र उतर जाता है।भूख बढ़ती है।खाई वस्तु तुरन्त पच जाती है।बवासीर,पाण्डुरोग,वायुगोला और हाथ पाँव की शोथ (सूजन) को दूर करता है।इस प्रकार के जल का सदा प्रयोग किया जाए तो रोग उत्पन्न ही नहीं होते।
(23) दीर्घजीवन:-जिस दिन बालक का जन्म हो,उसी दिन से शुद्ध-सोने को चौथाई चावल की मात्रा में घिसकर और जरा सा पानी मिलाकर १० दिन तक चटाते रहें।
इसके प्रयोग से आयु दीर्घ होती है,बच्चा सब प्रकार के रोगों से सुरक्षित रहता है।

(24) नजला:-सफेद मिर्च २१ दानें पानी के साथ सात दिन तक प्रतिदिन निगलवा दें।प्रभु कृपा से सदा के लिए नजला-जुकाम से छुट्टी मिल जायेगी।
(25) पीलिया:-६० ग्राम मूली के पत्तों का रस निकालकर इसमें १० ग्राम चीनी मिला लें।प्रातः बिना कुछ खाये-पिये इस रस को पिलायें।पीलिया को नष्ट करने के लिए रामबाण दवा है।
(26) बाल काले करना:-मालकांगनी के बीज (छिलका उतार दें) २५० ग्राम लेकर बोतल में भर लें और दृढ़ कार्क लगा दें।१० दानें प्रतिदिन पानी से निगल लें।निरन्तर एक वर्ष तक प्रयोग करें।
इन बीजों के सेवन से बुद्धि तीव्र होती है।चेहरा लाल हो जाता है।बाल पुनः काले होने लगते हैं।
पथ्य-गर्म वस्तुओं से बचें।

(27) उषःपान:-प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व ८ अंजलि जल पीना बड़ा लाभकारी है।ऋषियों ने इसकी बड़ी प्रशंसा की है।
'भावप्रकाश’ में लिखा है-

सवितुः समुदयकाले प्रसृतीसलिलस्य पिबेदष्टौ ।
रोगजरापरिमुक्तो जीवेद् वत्सरशतं साग्रम् ।।
सूर्योदय के समय जो व्यक्ति प्रतिदिन आठ अंजलि जल पान करता है वह रोगों से मुक्त हो जाता है,बुढ़ापा उसके पास नहीं फटकता और वह सौ वर्ष से भी अधिक आयु प्राप्त करता है।

प्रातः उषःपान करने से कब्ज,वीर्य सम्बन्धी रोग,बवासीर,उदररोग,कुष्ट,मूत्र और धातुरोग,सिरदर्द,नेत्रविकार ,निर्बलता तथा वात,पित्त और कफ आदि से होने वाले भयंकर से भयंकर रोग नष्ट हो जाते हैं।
यदि यह जल मुख के बजाय नासिका से पिया जाए तो सोने पे सुहागे का काम करता है।
नासिका द्वारा जलपान से सिर-दर्द,जुकाम-चाहे नया हो या पुराना,नजलि,नकसीर चलना आदि रोग जड़मूल से दूर हो जाते हैं।
शीत ऋतु में यदि जल बहुत शीतल हो तो उसे थोड़ा गर्म करके पान किया जा सकता है।
जल पीने के नियम:-लाभ सूर्योदय के पूर्व पीने से ही होता है।सूर्यास्त के पश्चात् जल कभी नहीं पीना चाहिये।
रात्रि के प्रथम पहर में जल विष है,मध्य रात्रि में दूध के समान और प्रातः सूर्योदय से पूर्व माँ के दूध के समान गुणकारी है।
भोजन के तुरन्त बाद भी जल नहीं पीना चाहिये।

(27) मल-मूत्र के वेगों को न रोकें:-बहुत से व्यक्ति किसी अन्य आवश्यक कार्य के कारण मल-मूत्र के वेगों को रोक लेते हैं।ऐसा करना शरीर के लिए बहुत हानिकर है।
एक कहानी
एक बड़ा सेठ मरकर अगला जन्म एक सर्प सूअर या कीड़े का पाता है ।
उसने भगवान से पूछा- हे प्रभु ! मैंने पूरा जीवन गरीबों की मदद की । खूब दान दिया । कोई पाप नहीं किया । तेरी वेद आज्ञा से मैंने पूरा जीवन जिया । फिर मुझे नर्क ऐसे कीड़े के रूप में अगला जन्म क्योंमिल रहा है जो सारा दिन गंदगी खाता है । ( कुछ कीड़े कार्बन लेकर आक्सीजन छोड़ते हैं )
तो उपनिषद का ऋषि इस काल्पनिक कहानी में समझाता है -
प्रभु बोले - वास्तव में ही हे सेठ तूँ एक पुण्य आत्मा है । तूने कोई पाप नहीं किया । तेरा जीवन अनुकरणीय है ।
मगर तूने मल मूत्र आदि से जो गंदगी फैलाई पूरे जीवन में , अपने हिस्से की उस गंदगी के लिए कभी तूने हवन नहीं किया ।
बस तेरा वो कर्ज रह गया है । अभी तुझे एक दो जन्म और मिलेंगे कीड़े-मकोड़ों के । तब तूँ स्वर्ग का अधिकारी बनेगा ।
हे सेठ ! तेरे जीवन कार्यों से मैं अति प्रसन्न हूँ । तूँ मुझे अति प्रिय है मगर न्यायिक विधान को मैं नहीं बदल सकता ।
Refined Oil 
मित्रो क्या आपने कभी विचार नहीं किया ??
कि आखिर जिस Refine तेल से आप अपनी और अपने छोटे बच्चों की मालिश नहीं कर सकते , जिस Refine को आप बालों मे नहीं लगा सकते , आखिर उस हानिकारक Refine तेल को कैसे खा लेते हैं ??
2 मिनट समय देकर Refine तेल की पुरी कहानी जरूर पढ़ें । 
मित्रो आज से 50 साल पहले तो कोई रिफाइन तेल के बारे में जानता नहीं था, ये पिछले 30-35 वर्षों से हमारे देश में आया है | कुछ विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे में लगी हुई हैं | शुरुवात मे इन्होने चक्कर चलाया और टेलीविजन के माध्यम से जम कर प्रचार किया लेकिन लोगों ने इनकी बात को माना नहीं तब इन्होने डाक्टरों के माध्यम से कहलवाना शुरू किया | डाक्टरों ने अपने प्रेस्क्रिप्सन में रिफाइन तेल लिखना शुरू किया कि तेल खाना तो सफोला का खाना या सनफ्लावर का खाना, ये नहीं कहते कि तेल, सरसों का खाओ या मूंगफली का खाओ, अब क्यों, आप सब समझदार हैं समझ सकते हैं |
पहले ये जान लीजिये ये रिफाइन तेल बनता कैसे हैं ? मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें तो बात समझ जायेंगे | किसी भी तेल को रिफाइन करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइन करने में ये संख्या 12 -13 हो जाती है | ये सब केमिकल मनुष्य के द्वारा बनाये हुए हैं प्रयोगशाला में, भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ जिसे हम ओरगेनिक कहते हैं |
तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब Inorganic हैं और Inorganic केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका combination जहर के तरफ ही ले जाता है | इसलिए रिफाइन तेल, डबल रिफाइन तेल गलती से भी न खाएं |
फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं ? तो आप शुद्ध तेल खाइए, सरसों का, मूंगफली का, तीसी का, या नारियल का | अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है | हमलोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया या एक तरह से कहे कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है | तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है, तो तेलों में जो बास आप पाते हैं वो उसका Organic content है
प्रोटीन के लिए | 4 -5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका Fatty Acid गायब | अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है, जहर मिला हुआ पानी | और ऐसे रिफाइन तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं, घुटने दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं, सबसे खतरनाक बीमारी है, हृदयघात (Heart Attack), पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि, आदि | जिन-जिन घरों में पुरे मनोयोग से रिफाइन तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइन तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ Heart Blockage और Heart Attack की समस्याएं हो रही है |
जब हमने सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डोक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई तो उन्होंने भी इसपर काम किया और उन डोक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है, उन्होंने कहा “तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइन में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ बच जाता है, और उसी को हम खा रहे हैं
तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है |” आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ?
मैं बता दूँ पहले आप ये जान लीजिये चिकनाहट भी दो तरह की होती है अच्छी चिकनाहट बुरी चिकनाहट । आपके चेहरे पर जो चमक है ,आपके घुटने हिलते डुलते है , आपके हाथ की उँगलियाँ मुड़ती है खुलती है ये सब अच्छी चिकनाहट के कारण है ,
कभी आप कोलोस्ट्रोल चैक करवाने जाएँ तो रिपोर्ट मे आप देखेंगे और डाक्टर आपको कहेगा आपका HDL (High Density Lipoprotein) बढ़ना चाहिए और LDL (LOW Density Lipoprotein) कम होना चाहिए ।
साधारण भाषा मे बोले तो HDL अर्थात अच्छी वाली चिकनाहट और LDL अर्थात गंदी वाली चिकनाहट । ( जो heart मे blockage करती है )
तो कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है HDL (High Density Lipoprotein), ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब | तो आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे |
अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है | मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में। वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखो-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत के बाजार में बेचा जा रहा है |
7 -8 वर्ष पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दुसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन GATT समझौता और WTO के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है | भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइन तेल और डबल रिफाइन तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है |
और जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा | क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी dissolve नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर dissolve नहीं होते और ट्रांस फैट जब शरीर में dissolve नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है |
तो मित्रो अच्छी चिकनाहट) (HDL ) लेने के लिए हमेशा शुद्ध तेल खाएं पहाड़ो मे रहने वाले तिल का तेल सबसे बढ़िया , मैदानी क्षेत्र मे रहने वालों के लिए सरसों का तेल सबसे बढ़िया , और समुन्द्र के पास रहने वालों के लिए नारियल का तेल सबसे बढ़िया । इसके अतिरिक्त मूँगफली आदि का तेल भी प्रयोग कर सकते है 
यदि आपको मेरी यह पोस्ट अच्छी लगे तो-   शेयर करे.

हर बीमारी पेट की गैस से शुरू होती है, गैस को जानें बीमारी से बचें


अगर आज के समय में कहा जाए की गैस ही सबसे बड़ी बीमारी और घर घर की बीमारी है तो कहना गलत नहीं होगा। यह भी कह सकते हैं की सभी बड़ी बीमारियाँ गैस से ही शुरू होती हैं। कुछ विशेषज्ञ यह भी कह सकते हैं कि अगर पेट में गैस ना हो तो सभी बीमारियों पर आसानी से विजय पायी जा सकती है। सीधा सा फार्मूला है; पेट में गैस का मतलब है लीवर में कमी, लीवर में कमी का मतलब है खून की कमी, खून की कमी का मतलब है बीमारियों से लड़ने की क्षमता में कमी, बीमारियों से लड़ने की क्षमता में कमी का मतलब है बड़ी बीमारियों को दावत देना और यह सब होता है सिर्फ पेट में गैस के कारण।

क्या है गैस
गैस प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में बनती है। यह शरीर से बाहर डकार द्वारा या गूदा मार्ग के द्वारा निकलती है। अधिकतर लोगों के शरीर में 1-4 पिंट्स गैस उत्पन्न होती है और एक दिन में कम से कम 14-23 बार गैस पास करते हैं। ऐसे लोग जिनकी पाचन शक्ति अक्सर खराब रहती है और जो प्रायः कब्ज के शिकार रहते हैं, उनमे गैस की समस्या अधिक होती है।

क्यूँ बढ़ रही है गैस की समस्या
अक्सर देखा जाता है कि चलते फिरते और हार्ड वर्क करने वालों के शरीर में गैस कम बनती है लेकिन ऐसे लोग जिनकी सक्रियता कम रहती है या जो अधिक समय तक बैठे रहते हैं उनके पेट में गैस अधिक मात्रा में बनती है। दूसरा कारण यह भी है कि आजकल लोगों की खान पान की आदतें बिगडती जा रही हैं। आजकल के लोगों में चबा चबा कर पोषक भोजन करने के बजाय जल्दी जल्दी से खाया जाने वाला जंक फूड या फ़ास्ट फूड अधिक पसंद है। यही वजह है कि आजकल बच्चे से लेकर बूढ़े, सभी लोग गैस की समस्या से अधिक परेशान रहते हैं। ज्यादा समय तक रहने वाली गैस की समस्या अल्सर में भी बदल सकती है।
क्यूँ बनती है गैस
हमारे शरीर के पाचनतंत्र में गैस दो तरीके से आती है।

1. निगली गयी हवा द्वारा
कभी कभी कुछ लोग अंजाने में हवा निगल लेते हैं जिसे चिकित्सा की भाषा में एरोफैगिया कहते हैं। यह भी पेट में गैस का प्रमुख कारण है। हर कोई थोड़ी मात्रा में कुछ खाते और कुछ पीते समय हवा निगल लेता है। हालाँकि जल्दी जल्दी खाने या पीने, च्युंगम चबाने, धूम्रपान करने से कुछ लोग ज्यादा हवा अन्दर ले लेते हैं, जिसमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड होती है। कुछ हवा तो डकार के द्वारा बाहर निकल जाती है। बची हुई हवा आंत में चली जाती है जहाँ इसकी कुछ मात्रा अवशोषित हो जाती है। बची हुई थोड़ी सी गैस यहाँ से बड़ी आंत में चली जाती है जो गूदा मार्ग द्वारा बाहर निकलती है। पेट में थोड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड भी बनती है, लेकिन यह अवशोषित हो जाती है और बड़ी आंत में प्रवेश नहीं करती है।

2. अनपचे भोजन का टूटना
हमारा शरीर कुछ कार्बोहाइड्रेट को ना तो पचा पाटा है और ना ही अवशोषित कर पाता है। छोटी आंत में कुछ निश्चित एंजाइमों की कमी या अनुपस्थिति से इनका पाचन नहीं हो पाता। यह अनपचा भोजन जब छोटी आंत से बड़ी आंत में आता है तो बैक्टीरिया के द्वारा किण्वन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है जिसमे गैस बनती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में एंजाइमों का स्तर कम हो जाता है इसलिए बढती उम्र के साथ साथ गैस की समस्या भी बढ़ती जाती है।

गैस के लक्षण और समस्याएँ
पेट में गैस बनने के सबसे आम लक्षण हैं:
पेट फूल जाना
पेट में दर्द होना
डकार आना और गैस पास करना
अत्यधिक गैस पास होना
गूदा मार्ग से बदबूदार गैस निकलना
जीभ पर सफ़ेद परत जमा हो जाना
सांस में बदबू आना
मल में बदबू आना
दस्त लगना
कब्ज होना

भोजन जिससे अधिक गैस बनती है
सब्जियां जैसे ब्रोकली, पत्तागोभी, फूलगोभी और प्याज
मैदे से बने खाद्य पदार्थ, दूध और दूध से बने उत्पाद
मीट और अंडा
डिब्बाबंद भोजन
फ़ास्ट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक
बाजार की खुली चीजें
अधिक तली, भुनी चीजें
अधिक प्रोटीन और हार्ड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ

गैस से बचने के उपाय
कार्बोनेटेड ड्रिंक और वाइन ना पियें, क्यूंकि यह कार्बन डाई ऑक्साइड रिलीज करते हैं।
पाइप के द्वारा कोई चीज ना पियें, सीधे गिलास से पियें।
अधिक तले भुने और मसालेदार भोजन से बचें या कम खाएं।
तनाव भी गैस बनने का मुख्य कारण है इसलिए तनाव से बचें।
कब्ज भी गैस बनने का एक प्रमुख कारण है इसलिए जितने लम्बे समय तक भोजन बड़ी आंत में रहेगा, उतनी अधिक मात्रा में गैस बनेगी।
भोजन को धीरे धीरे चबाकर खाएं, दिन में तीन बार पूरा भोजन करने के बजाय, कुछ घंटों के अंतराल पर थोडा थोडा खाएं।
खाने के तुरंत बाद ना सोयें, थोड़ी देर टहलें। इससे पाचन भी सही रहेगा और पेट भी नहीं फूलेगा।
खाने पीने के समय को निर्धारित करें, एक निश्चित समय पर ही भोजन खाएं।
अगर मेहनत कम करते हों तो अधिक कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन कम खाएं और प्रोटीन वाले भोजन अधिक लें।
अपने शरीर को समझें, अगर दूध से एलर्जी होती हो तो दूध और दूध से बने पदार्थ ना लें।
मौसमी फल और सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करें।
खाना पकाते समय मसालों जैसे, सरसों, इलाइची, जीरा और हल्दी का उपयोग अधिक करें, इससे गैस कम मात्रा में बनती है।
संतुलित और घर का भोजन करें, जंक फूड, फ़ास्ट फूड और खुले में बने फूड से बचें।
शरीर को शक्रिय रखें, कसरत और योगा करें, पैदल चलने की आदत डालें।
धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
अपने भोजन में अधिक से अधिक रेशेदार भोजन को शामिल करें।
सर्वांगसन, उत्तानपादासन, भुजंगासन, प्राणायाम आदि योगासन करने से गैस की समस्या ख़त्म हो जाती है।
सबसे काम की बात: अगर कर सकते हों तो सुबह उठने के बाद तीन चार गिलास पानी पियें और उसे उल्टी करके वापस निकाल दें। हो सकता है कुछ दिन परेशानी हो लेकिन एक बार आदत पड़ने के बाद रोज करने से ताउम्र गैस से छुटकारा पाया जा सकता है।

जीवनशैली में लायें बदलाव
ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वालों को गैस की समस्या अधिक होती है ऐसे लोगों को हर घंटे के बाद कुर्सी से उठकर थोडा टहलना चाहिए।
दोपहर का खाना खाने के बाद कुछ देर टहल लें।
लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का उपयोग करें।
खाने के बाद नींबू पानी या फल खासकर पपीता जरूर खाएं।
खाने के तुरंत बाद ज्यादा पानी ना पीयें, आधे या एक घंटे बाद ही पानी पीयें। भोजन के दौरान प्यास से बचने के लिए एक आधे घंटे बाद ही पानी पी लें।
ग्रीन टी का जरूर इस्तेमाल करें।

रोकथाम और घरेलु उपचार
लहसुन पाचन की प्रक्रिया को बढाता है और गैस की समस्या को कम करता है।
अपने भोजन में दही को शामिल करें।
नारियल पानी भी गैस की समस्या में काफी प्रभावशाली है।
अदरक में पाचक एंजाइम होते हैं। खाने के बाद अदरक के टुकड़ों को नीबू के रस में डुबोकर खाएं।
अगर आप लम्बे समस्य तक गैस की बीमारी से पीड़ित है तो लहसुन की तीन कलियाँ और अदरक के कुछ टुकडें सुबह खाली पेट खाएं।
प्रतिदिन खाने के समय टमाटर या सलाद खाएं, टमाटर में सेंधा नमक मिलाकर खाने से अधिक लाभ मिलता है।
पोदीना भी पाचन तंत्र में अधिक लाभकारी है।
इलाइची के पाउडर को एक गिलास पानी में उबाल लें। इसको खाना खाने के बाद गुनगुने रूप में पी लें, गैस से लाभ मिलेगा।

यदि आपको मेरी यह पोस्ट अच्छी लगे तो-   शेयर करे.
आयुर्वेद का वरदान

आज मनुष्य मे स्वार्थ व पक्षपात बढ़ता जा रहा है। मानव मे मानवता खत्म होती जा रही है। आज सामान्य मनुष्य की चिकित्सा की तो बात दूर भोजन पर भी दुष्टों की नजर है।
फिल्मों मे अपने को गरीब का प्यारा दिखाने वाले अमिताभ बच्चन हो या माधुरी दीक्षित पैसे के लिए TV पर मैगी नाम का जहर बेच रहे हैं।
यदि किसी गरीब को लीवर का रोग या गुर्दे का रोग हो जाए तो ठीक होने के लिए बेचारे को घर बेचना पड़ता है। सरकारी अस्पताल मे रोग का पता केवल पोस्ट मार्टम से ही चलता है।
परंतु वेदवाणी के अनुसार आचरण करने वाले परम दयालु महर्षियों ने आयुर्वेद रूपी अमृत को बिना किसी भेदभाव के बांटा। ऋषियों का यह अमृत उन के लिए भी है जो उन्हे आदर्श मानते हैं।
उनके लिए भी है जो अपने को मूल निवासी कहकर ऋषियों को गाली देने मे ही गौरव अनुभव करते हैं और खुद को रावण और महिषासुर का वंशज बताते हैं। हत्यारे अफजल गुरु + मकबूल भट्ट+ याकूब मेनन की प्रशंसा करते और भारत के सच्चे सपूत सैनिकों को हत्यारा कहते हैं.

आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रन्थ सुश्रुत संहिता सूत्र स्थान अध्याय 2 मे महर्षि धन्वन्तरी जी अपने शिष्य को जनेऊ देते समय उपदेश देते है- 
ब्राह्मण, गुरु, दरिद्र, मित्र, सन्यासी, पास मे नम्रता पूर्वक आए, सज्जन, अनाथ, दूर से आए सज्जनों की चिकित्सा स्वजनों (अपने परिवार के सदस्य) की भांति अपनी औषधियों से करनी चाहिए। यह करना साधु (श्रेष्ठ ) है। 
व्याध (शिकारी), चिड़िमार, पतित (नीच आचरण वाला) पाप करने वालो की चिकित्सा धन का लाभ होने पर भी नहीं करनी चाहिए। 
ऐसा करने से विद्या सफल होती है, मित्र, यश, धर्म, अर्थ और काम की प्राप्ति होती है। ऐसा ही विवरण चरक संहिता मे मिलता है। (क्या आज का चिकित्सक यह कर्त्तव्य निभाता है) 


यह अमृत पाना इतना आसान है कि गरीब से गरीब भी इसका प्रयोग कर सकता है। इतना प्रभावशाली है कि बड़े बड़े महंगे इलाज भी इससे बढ़ कर नहीं है। 
गर्मी मे 2 अंगों की बीमारियाँ बहुत अधिक होती हैं। 
1- यकृत = Liver के रोग – जैसे पीलिया, 
2- गुर्दे = Kidney के रोग 
इन दोनों रोगों के लिए आयुर्वेद मे एक चमत्कारी औषधि है – भूमि आंवला/ भूम्यामलकी/ PHYLLANTHUS NIRURI
यह एक छोटा सा पौधा है जो बरसात मे अपने आप उग जाता है। यह परम पिता परमात्मा की महान कृपा है कि जीवन दायिनी जड़ी बूटियाँ अपने आप उगती रहती हैं। सभी जड़ी बूटी की दुकानों पर सुखा हुआ भूमि आंवला का पौधा मिल जाता है.
वैसे यह बरसात मे अपने आप उग जाता है परंतु छायादार नमी वाले स्थानो पर पूरा साल मिलता है। इसके पत्ते के नीचे छोटा सा फल लगता है जो देखने मे आंवले जैसा ही दिखाई देता है। बरसात मे यह मिल जाए तो इसे उखाड़ कर रख ले व छाया मे सूखा कर रख ले।
जड़ी बूटी की दुकान से आसानी से मिल जाता है। 


यकृत की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है . लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा . बिलीरुबिन बढ़ गया है , पीलिया हो गया है, सारा शरीर पीला व मूत्र का रंग लाल पीला हो गया हो तो इसका प्रयोग बहुत लाभकारी है. रोग की शुरुआत में ही इसका प्रयोग करना शुरू करे तो अधिकाँश रोगियों को अस्पताल में भरती होने की जरूरत ही नहीं होगी. 
पीलिया किसी भी कारण से हो चाहे पीलिया का रोगी मौत के मुंह मे हो यह देने से बहुत अधिक लाभ होता है। LIVER CIRRHOSIS जिसमे यकृत मे घाव हो जाते हैं यकृत सिकुड़ जाता है उसमे भी बहुत लाभ करता है। Fatty LIVER जिसमे यकृत मे सूजन आ जाती है पर बहुत लाभ करता है।

Kidney (गुर्दे) की समस्या के आरम्भ में जैसे पेशाब मे इन्फेक्शन, पेशाब में खून आना, पेशाब में जलन होना, पेशाब की मात्रा कम हो जाना आदि में बहुत लाभ करेगा। 
इसका कोई साइडेफेक्ट नहीं है 
लीवर व किडनी के रोगी को खाने मे घी तेल मिर्च खटाई व सभी दाले बंद कर देनी चाहिए। मूंग की दाल कम मात्रा मे ले सकते हैं। मिर्च के लिए कम मात्र मे काली मिर्च व खटाई के लिए अनारदाना प्रयोग करना चाहिए। 

प्रयोग विधि –
सुखा पौधा लाकर छोटे छोटे टुकडे कर ले. 4 चम्मच यह टुकडे धोकर 2 कप पानी में चाय की तरह उबाल कर बर्तन को ढक दे. ठण्डा होने पर छान कर पि ले. दिन में 3 बार.
ताजा पौधा पीस कर ज़रा सा पानी मिलाकर रस निकाल ले. 2 चम्मच यह रस दिन में 2 से 3 बार ले.


भोजन मे चावल का अधिक प्रयोग करना चाहिए 
हरे नारियल का पानी लिवर (यकृत /जिगर) के रोग बहुत अच्छा है परन्तु गुर्दे के रोगों में हमेशा उपयोगी नहीं होता इसलिए गुर्दे के रोगी को विचार कर पीना चाहिए.


भोजन – 
1- सभी किस्म की दाले बंद कर दे। केवल मूंग बिना छिलके की दाल ले सकते। 
2-लाल मिर्च, हरी मिर्च, अमचूर, इमली, गरम मसाला और पैकेट का नमक बंद कर दे। 
3- सैंधा नमक और काली मिर्च का प्रयोग करे बहुत कम मात्रा मे। 
4- यदि खटाई की इच्छा हो खट्टा सूखा अनारदाना प्रयोग करे। 
5- प्रतिदिन लगभग 50 ग्राम किशमिश/दाख/ मुनक्का (सूखा अंगूर) , खजूर व सुखी अंजीर पानी मे धो कर खिलाए। 
6- चावल उबालते समय जो पानी (माँड़) निकलता है वह ले। वह स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। 
7- गेहू का दलिया, लौकी की सब्जी, परवल की सब्जी दे 
8- भिंडी, घुइया (अरबी), कटहल आदि न खाए। 
9- सफ़ेद पेठा (कूष्माण्ड जिसकी मिठाई बनाई जाती है) वह मिले तो उसका रस पिए व उसकी सब्जी खाए। पीले रंग का पेठा जिसे काशीफल या सीताफल कहते हैं वह न खाए.
10 – तम्बाकू +शराब+ बीयर+कोका कोला+पेप्सी +बाजार के शर्बत+ जलजीरा+गोलगप्पा +समोसा+पकौडा+काजू, बादाम +मूंगफली – बिलकुल बन्द. ———–

यदि आपको मेरी यह पोस्ट अच्छी लगे तो-   शेयर करे.