Thursday, 24 March 2016

Defects 
दुर्गुण

पुराने जमाने की बात है। गुरुकुल के एक आचार्य अपने शिष्य की सेवा भावना से बहुत प्रभावित हुए। विधा पूरी होने के बाद शिष्य को विदा करते समय उन्होंने आशीर्वाद के रूप में उसे एक ऐसा दिव्य दर्पण भेंट किया, जिसमें व्यक्ति के मन के भाव को दर्शाने की क्षमता थी।
शिष्य उस दिव्य दर्पण को पाकर बहुत खुश हुआ। उसने परीक्षा लेने की जल्दबाजी में दर्पण का मुँह सबसे पहले गुरुजी के सामने ही कर दिया। वह यह देखकर आश्चर्यचकित हो गया कि गुरुजी के हृदय में मोह, अहंकार, क्रोध आदि दुर्गुण परिलक्षित हो रहे थे। इससे उसे बड़ा दुख हुआ। वह तो अपने गुरुजी को समस्त दुर्गुणों से रहित सत्पुरुष समझता था।
दर्पण लेकर वह गुरुकुल से रवाना हो गया। उसने अपने कई मित्रों तथा अन्य परिचितों के सामने दर्पण रखकर परीक्षा ली। सब के हृदय में कोई न कोई दुर्गुण अवश्य दिखाई दिया।और तो और अपने माता व पिता की भी वह दर्पण से परीक्षा लेने से नहीं चूका। उनके हृदय में भी कोई न कोई दुर्गुण देखा, तो वह हतप्रभ हो उठा। एक दिन वह दर्पण लेकर फिर गुरुकुल पहुँचा।
उसने गुरुजी से विनम्रतापूर्वक कहा- “गुरुदेव, मैंने आपके दिए दर्पण की मदद से देखा कि सबके दिलों में तरह तरह के दोष और दुर्गुण हैं।“
तब गुरु जी ने दर्पण का रुख शिष्य की ओर कर दिया। शिष्य दंग रह गया। क्योंकि उसके मन के प्रत्येक कोने में राग,द्वेष, अहंकार, क्रोध जैसे दुर्गुण थे।
तब गुरुजी बोले- “वत्स यह दर्पण मैंने तुम्हें अपने दुर्गुण देखकर जीवन में सुधार लाने के लिए दिया था। दूसरों के दुर्गुण देखने के लिए नहीं। जितना समय तुमने दूसरों के दुर्गुण देखने में लगाया, उतना समय यदि तुमने स्वयं को सुधारने में लगाया होता तो अब तक तुम्हारा व्यक्तित्व बदल चुका होता। मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि वह दूसरों के दुर्गुण जानने में ज्यादा रुचि रखता है। वह स्वयं को सुधारने के बारे में नहीं सोचता। इस दर्पण की यही सीख है जो तुम नहीं समझ सके।“
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दोस्तों ये हम पर भी लागु होती है। हममें से भी ज़्यादातर लोग अपने अंदर छिपी बड़ी बड़ी बुराइयों को, दुर्गुणों को, गलत आदतों को भी सुधारना नहीं चाहते। लेकिन दूसरों की छोटी छोटी बुराइयों को भी उसके प्रति द्वेष भावना रखते हैं या उसे बुरा भला कहते हैं या फिर दूसरो को सुधरने के लिए उपदेश देने लग जाते हैं। तो सबसे पहले अपने अंदर झांको और अपनी बुराइयों को दूर करो।

Effort (A Motivational Story)
प्रयास

एक बार एक Science की Research प्रयोगशाला में एक experiment किया गया। एक बड़े शीशे के टैंक में बहुत सारी छोटी छोटी मछलियाँ छोड़ी गयीं और फिर ढक्कन बंद कर दिया। अब थोड़ी देर बाद एक बड़ी शार्क मछली को भी टैंक में छोड़ा गया लेकिन शार्क और छोटी मछलियों के बीच में एक काँच की दीवार बनायीं गयी ताकि वो एक दूसरे से दूर रहें। शार्क मछली की एक खासियत होती है कि वो छोटी छोटी मछलियों को खा जाती है। 

अब जैसे ही शार्क को छोटी मछलियाँ दिखाई दीं वो झपट कर उनकी ओर बढ़ी। जैसे ही शार्क मछलियों की ओर गयी वो कांच की दीवार से टकरा गयी और मछलियों तक नहीं पहुँच पायी। शार्क को कुछ समझ नहीं आया वो फिर से छोटी मछलियों की ओर दौड़ी लेकिन इस बार भी वो विफल रही। 

शार्क को बहुत गुस्सा आया अबकी बार वो पूरी ताकत से छोटी मछलियों पे झपटी लेकिन फिर से कांच की दीवार बाधा बन गयी। कुछ घंटों तक यही क्रम चलता रहा, शार्क बार बार मछलियों पर हमला करती और हर बार विफल हो जाती। कुछ देर बाद शार्क को लगा कि वह मछलियों को नहीं खा सकती, यही  सोचकर शार्क ने हमला करना बंद कर दिया वो थक कर आराम से पानी में तैरने लगी। अब कुछ देर बाद Scientists ने उस कांच की दीवार को शार्क और मछलियों के बीच से हटा दिया उन्हें उम्मीद थी कि शार्क अब सारी मछलियों को खा जाएगी। लेकिन ये क्या, शार्क ने हमला नहीं किया ऐसा लगा जैसे उसने मान लिया हो कि अब वो छोटी मछलियों को नहीं खा पायेगी। 

काफी देर गुजरने के बाद भी शार्क खुले टैंक में भी मछलियों पर हमला नहीं कर रही थी। इसे कहते हैं – सोच। कहीं आप भी शार्क तो नहीं? हाँ! हममें से काफी लोग उस शार्क की तरह ही हैं जो किसी कांच जैसी दीवार की वजह से ये मान बैठे हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते। और हममें से काफी लोग तो ऐसे जरूर होंगे जो शार्क की तरह कोशिश करना भी छोड़ चुके होंगे। लेकिन सोचिये जब टैंक से दिवार हटा दी गयी फिर भी शार्क ने हमला नहीं किया क्यूंकि वो हार मान चुकी थी, कहीं आपने भी तो हार नहीं मान ली? कोई परेशानी या अवरोध हमेशा नहीं रहता , क्या पता आपकी काँच की दीवार भी हट चुकी हो लेकिन आप अपनी सोच की वजह से प्रयास ही नहीं कर रहे।

आप भी कहीं ना कहीं ये मान बैठे हैं कि मैं नहीं कर सकता। पर मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि एक दिन आपकी दीवार भी जरूर हटेगी या हट चुकी होगी। जरुरत है तो सिर्फ आपके पुनः प्रयास की। तो सोचिये मत, प्रयास करते रहिये आप जरूर कामयाब होंगें। 

Ayurveda tips to white hairs to Black

बालों को काला करने के घरेलू नुस्खे

आंवला पाउडर (Aanvala Powder)
आंवले के पाउडर को लोहे के काले रंग के बर्तन में एक दिन तक रखिए और दूसरे दिन सुबह इसमें थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बना लीजिए। इस पेस्ट को पूरे एक हफ्ते तक पानी मिला कर लोहे बर्तन में रखना है। हफ्ते भर में यह पेस्ट बिल्कुल काला हो जाएगा। जब यह पेस्ट पूरी तरह काला हो जाए तो इसे डाई की तरह बालों में लगाएं। इस विधि को दो-तीन बार अलग-अलग दिन पर आजमाए। बालों में कुदरती काला रंग आने लगेगा।

शिकाकाई (Shikakai)
शिकाकाई और सूखे आंवले लेकर को अच्छी तरह से कूट ले। दोनों के टुकड़ों को रात भर पानी में भिगों कर रखें। सुबह इस पानी को कपड़े के साथ मसलकर छान लें और इससे बालों की मालिश करें। मालिश करने के आधा घंटा बाद बाद नहा लें। बालों के सूखने पर नारियल का तेल लगायें। ऐसा करने से बाल काले, लंबे, मुलायम और चमकदार होते हैं। खास बात यह है कि शिकाकाई और आंवले से बाल कभी सफेद नहीं होते व जिनके बाल सफेद हों तो वे भी काले हो जाते हैं.

नारियल व जैतून का तेल और नींबू का रस (Coconut Oil, Olive Oil and Lemon Juice)
नारियल के तेल और जैतून के तेल (ऑलिव ऑयल) की बराबर मात्रा लेकर इसमें नींबू की कुछ बूंदे मिला कर बालों की मालिश करें। मालिश के बाद फिर गर्म तौलिए से सिर को तीन मिनट के लिए ढकें। ऐसा करने से बालों का झड़ना (hair fall) बंद होता है और बाल काला भी होता है।

मेथी पाउडर (Methi Powder)
मेथी के बीजों में बालों को पोषण देने वाले सभी जरुरी तत्व मौजूद होते हैं। मेथी के बीज में फॉस्फेट, लेसिथिन, न्यूक्लिओ-अलब्यूमिन और कॉड-लिवर ऑयल के साथ फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, नियासिन, थियामिन, कैरोटीन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बालों की जड़ों को मजबूती प्रदान करते हैं।

 मेथी दानों को ग्राईंडर में पीसकर चूर्ण बना लें। चूर्ण में पानी मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें और इस पेस्ट को बालों में लगाएं। इसे लगाने से बाल काला, घना और लंबा तो होगा ही, डैंड्रफ की परेशानी भी खत्म होगी।

अमरबेल (Amarbel)
करीब 250 ग्राम अमरबेल को लगभग तीन लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा हो जाए और अमरबेल पानी में पूरी तरह मिल जाए तो तो इसे उतार लें। सुबह के समय इससे बालों को धोयें. इससे बाल लंबे, काले और घने होते हैं।

त्रिफला (Triphala)
त्रिफला चूर्ण में लगभग एक चौथाई ग्राम लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है और बालों में कुदरती रंग आती है।

कलौंजी (Klaunji)
एक लीटर पानी में पचास ग्राम कलौंजी उबाल लें। इस उबले हुए पानी को ठंडाकर इससे बालों को धोएं। बाल एक महीने के अंदर काले और लंबे हो जाएंगे।

नीम (Neem)
नीम के पत्तों को पानी के साथ पीसकर बालों में लगाएं व दो-तीन घंटे के बाद बालों को धो डालें। इससे बालों का झड़ना कम होगा और बाल लंबे और काले भी होंगे।

मेंहदी और आंवला (Mehandi and Aanvala)
सूखी मेंहदी और सूखा आंवला की बराबर मात्रा लेकर शाम को पानी में भींगने के लिए छोड़ लें। रात भर भींगने के बाद सुबह इससे बालों को धोएंट इसे लगातार आजमाने बाल काले, मुलायम और लंबे होते हैं।

रीठा (Reetha)
एक ग्राम कपूर, 100 ग्राम नागरमोथा और रीठे के फल की गिरी, शिकाकाई पाव भर और 200 ग्राम आंवला, इन सभी को मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को आधा ग्लास पानी में मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को बालों में लगाएं लेप सूखने के बाद गुनगुने पानी से बालों को अच्छी तरह धो लें। इससे बाल काले, घने और मुलायम होते हैं। रीठा, आंवला व शिकाकाई को आपस में मिलाकर बाल धोने से बाल सिल्की और चमकदार होती है।

शंखपुष्पी (Sankhpushpee)
शंखपुष्पी से बने तेल रोजाना नियमित रूप से बालों में लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।

भांगरा (Bhangra)
जहां पर बाल न हों, वहां पर भांगरा के पत्तों के रस से मालिश करने से कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकल सकते हैं। जिन लोगों के बाल अधिक टूटते-झड़ते हैं उन्हें इस उपाय को जरूर आजमाना चाहिए। त्रिफला चूर्ण को भांगरा के रस में उबाल कर फिर इसे अच्छी तरह से सुखाकर, पीसकर रख लें। इसे प्रतिदिन सुबह के समय लगभग 2 ग्राम तक सेवन करने से बालों का सफेद होना बंद हो जाता है।

काला तिल (Kala Til)
काले तिल के तेल बालों में लगाने से बाल सफेद नहीं होते हैं। रोजाना सिर में तिल के तेल की मालिश करने से बाल हमेशा मुलायम, काले और घने बने रहते हैं।

Monday, 21 March 2016

Sunday, 20 March 2016

Mother - माँ

एक औरत थी, जो अंधी थी, जिसके कारण उसके बेटे को स्कूल में बच्चे चिढाते थे, कि अंधी का बेटा आ गया,
हर बात पर उसे ये शब्द सुनने को मिलता था कि "अन्धी का बेटा".
इसलिए वो अपनी माँ से चिडता था. उसे कही भी अपने साथ लेकर जाने में हिचकता था उसे नापसंद करता था..
उसकी माँ ने उसे पढ़ाया..
और उसे इस लायक बना दिया की वो अपने पैरो पर खड़ा हो सके..
लेकिन जब वो बड़ा आदमी बन गया तो अपनी माँ को छोड़ अलग रहने लगा..
एक दिन एक बूढी औरत उसके घर आई और गार्ड से बोली.. 
मुझे तुम्हारे साहब से मिलना है जब गार्ड ने अपने मालिक से बोल तो मालिक ने कहा कि बोल दो मै अभी घर पर नही हूँ.
गार्ड ने जब बुढिया से बोला कि वो अभी नही है..
तो वो वहा से चली गयी..!!
थोड़ी देर बाद जब लड़का अपनी कार से ऑफिस के लिए जा रहा होता है.. तो देखता है कि सामने बहुत भीड़
लगी है..
और जानने के लिए कि वहा क्यों भीड़ लगी है वह वहा गया तो देखा उसकी माँ वहा मरी पड़ी थी..
उसने देखा की उसकी मुट्ठी में कुछ है उसने जब मुट्ठी खोली तो देखा की एक लेटर जिसमे यह लिखा था कि बेटा जब तू छोटा था तो खेलते वक़्त तेरी आँख में सरिया धंस गयी थी और तू अँधा हो गया था तो मैंने तुम्हे
अपनी आँखे दे दी थी.. 
इतना पढ़ कर लड़का जोर- जोर से रोने लगा..
उसकी माँ उसके पास नही आ सकती थी..
दोस्तों वक़्त रहते ही लोगो की वैल्यू करना सीखो.. 
हमारी प्यास का अंदाज़ भी अलग है दोस्तों, कभी समंदर को ठुकरा देते है,
तो कभी आंसू तक पी जाते है..!!!
"बैठना भाइयों के बीच, चाहे "बैर" ही क्यों ना हो..
और खाना माँ के हाथो का, चाहे "ज़हर" ही क्यों ना हो..!!... 
Unemployment  - बेकारी का हाल

नदी में डूबते हुए आदमी ने पुल पर चलते हुए आदमी को आवाज़ लगायी।

आदमी: "बचाओ-बचाओ।"

पुल पर चलते आदमी ने नीचे देखा और उस आदमी को बचाने के लिए पुल से नीचे रस्सी फैंकी और कहा, "रस्सी को पकड़ के ऊपर आ जाओ।"

परन्तु नदी में डूबता हुआ आदमी रस्सी नहीं पकड़ पा रहा था तो वह डर के मारे चिल्ला कर बोला, "मैं मरना नहीं चाहता, ज़िन्दगी बड़ी कीमती है कल ही तो मेरी टार्जन कंपनी में बड़ी अच्छी नौकरी लगी है।"

इतना सुनते ही पुल पर चलते आदमी ने अपनी रस्सी खींच ली और भागते-भागते टार्जन कंपनी के दफ्तर में गया वहां के मैनेजर से बोला," जिस आदमी को आपने कल नौकरी दी थी वो अभी-अभी डूबकर मर गया है, और इस तरह आपकी कंपनी में एक जगह खाली हो गयी है, मैं बेरोजगार हूँ इसीलिए मुझे रख लीजिये।"

मैनेजर: "दोस्त, तुमने देर कर दी, अब से कुछ देर पहले हमने उस आदमी को रखा है, जो उसे धक्का दे कर तुमसे पहले यहाँ आया है।" 
When the wind blows, so I sleep
जब हवा चलती है तो मैं सोता हूँ

बहुत समय पहले की बात है, आइस्लैंड के उत्तरी छोर पर एक किसान रहता था. उसे अपने खेत में काम करने वालों की बड़ी ज़रुरत रहती थी लेकिन ऐसी खतरनाक जगह, जहाँ आये दिन आंधी–तूफ़ान आते रहते हों , कोई काम करने को तैयार नहीं होता था.

किसान ने एक दिन शहर के अखबार में इश्तहार दिया कि उसे खेत में काम करने वाले एक मजदूर की ज़रुरत है. किसान से मिलने कई लोग आये लेकिन जो भी उस जगह के बारे में सुनता, वो काम करने से मन कर देता. अंततः एक सामान्य कद का पतला -दुबला अधेड़ व्यक्ति किसान के पास पहुंचा.

किसान ने उससे पूछा , “ क्या तुम इन परिस्थितयों में काम कर सकते हो ?”

“ ह्म्म्म, बस जब हवा चलती है तब मैं सोता हूँ .” व्यक्ति ने उत्तर दिया .

किसान को उसका उत्तर थोडा अजीब लगा लेकिन चूँकि उसे कोई और काम करने वाला नहीं मिल रहा था इसलिए उसने व्यक्ति को काम पर रख लिया.

मजदूर मेहनती निकला, वह सुबह से शाम तक खेतों में मेहनत करता, किसान भी उससे काफी संतुष्ट था. कुछ ही दिन बीते थे कि एक रात अचानक ही जोर-जोर से हवा बहने लगी, किसान अपने अनुभव से समझ गया कि अब तूफ़ान आने वाला है. वह तेजी से उठा, हाथ में लालटेन ली और मजदूर के झोपड़े की तरफ दौड़ा.

“ जल्दी उठो, देखते नहीं तूफ़ान आने वाला है, इससे पहले की सबकुछ तबाह हो जाए कटी फसलों को बाँध कर ढक दो और बाड़े के गेट को भी रस्सियों से कस दो.” किसान चीखा .

मजदूर बड़े आराम से पलटा और बोला, “ नहीं जनाब, मैंने आपसे पहले ही कहा था कि जब हवा चलती है तो मैं सोता हूँ !!!.”

यह सुन किसान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया, जी में आया कि उस मजदूर को गोली मार दे, पर अभी वो आने वाले तूफ़ान से चीजों को बचाने के लिए भागा.

किसान खेत में पहुंचा और उसकी आँखें आश्चर्य से खुली रह गयी, फसल की गांठें अच्छे से बंधी हुई थीं और तिरपाल से ढकी भी थी, उसके गाय -बैल सुरक्षित बंधे हुए थे और मुर्गियां भी अपने दडबों में थीं … बाड़े का दरवाज़ा भी मजबूती से बंधा हुआ था. सारी चीजें बिलकुल व्यवस्थित थी …नुक्सान होने की कोई संभावना नहीं बची थी. किसान अब मजदूर की ये बात कि “जब हवा चलती है तब मैं सोता हूँ ”…समझ चुका था, और अब वो भी चैन से सो सकता था .

मित्रों , हमारी ज़िन्दगी में भी कुछ ऐसे तूफ़ान आने तय हैं, ज़रुरत इस बात की है कि हम उस मजदूर की तरह पहले से तैयारी करके रखें ताकि मुसीबत आने पर हम भी चैन से सो सकें. जैसे कि यदि कोई विद्यार्थी शुरू से पढ़ाई करे तो परीक्षा के समय वह आराम से रह सकता है, हर महीने बचत करने वाला व्यक्ति पैसे की ज़रुरत पड़ने पर निश्चिंत रह सकता है, इत्यादि.

Sukhi khansi dry cough home remedis in hindi
सूखी खांसी दूर करने के कुछ घरेलू नुस्खे


  • खांसी होने पर अनार के छिलके का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसे। इसके अलावा अनार के छिलकों को सूखाकर चूर्ण बनाकर सेवन करें।
  • भोजन के बाद दोनों समय आधा चम्मच सौंठ चबाने से सुखी खांसी में आराम मिलता है।
  • भुनी हुई फिटकरी और चीनी (एक रत्ती) दोनों को मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें। 4/5 दिन में काली खांसी ठीक हो जायेगी।
  • दही दो चम्मच, चीनी एक चम्मच, काली मिर्च का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर चाटने से बच्चों की काली खांसी और बूढ़ों की सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
  • आधा चम्मच अदरक का रस और आधा चम्मच शहद चाटने से खांसी में आराम मिलता है।
  • काली मिर्च पीसकर उसमें चार गुना गुड़ मिलाकर आधा ग्राम की गोलियां बना ले इससे खांसी जुकाम व सर्दी के रोगों में लाभ होता है।
  • खांसी होने पर लौंग बराबर चूसते रहे। सिके हुए लौंग अधिक लाभदायक रहते हैं। इसके अलावा काली मिर्च मुंह में रखकर चूसे।
  • सूखे आंवले का चूर्ण मिश्री के साथ लें। हल्दी भूनकर घी या शहद के साथ मिलाकर लें।



Mehndi - मेंहदी

पापा देखो मेंहदीवाली, मुझेमेंहदी लगवानी है, पंद्रह साल की छुटकी बाज़ार में बैठी मेंहदी वाली को देखते ही मचल गयी.
कैसे लगाती हो मेंहदी " विनय नें सवाल किया.
एक हाथ के पचास दो के सौ " मेंहदी वाली ने जवाब दिया. विनय को मालूम नहीं था मेंहदी लगवाना इतना मँहगा हो गया है.
नहीं भई एक हाथ के बीस लो वरना हमें नहीं लगवानी.
यह सुनकर छुटकी नें मुँह फुला लिया. "अरे अब चलो भी ,नहीं लगवानी इतनी मँहगी मेंहदी "विनय के माथे पर लकीरें उभर आयीं .
अरे लगवाने दो ना साहब. अभी आपके घर में है तो आपसे लाड़ भी कर सकती है. कल को पराये घर चली गयी तो पता नहीं ऐसे मचल पायेगी या नहीं. तब आप भी तरसोगे बिटिया की फरमाइश पूरी करने को.
‎मेंहदी‬ वाली के शब्द थे तो चुभने वाले पर उन्हें सुनकर विनय को अपनी बड़ी बेटी की याद आ गयी जिसकी शादी उसने तीन साल पहले एक खाते -पीते पढ़े लिखे परिवार में की थी. उन्होंने पहले साल से ही उसे छोटी छोटी बातों पर सताना शुरू कर दिया था. 
दो साल तक वह मुट्ठी भर भर के रुपये उनके मुँह में ठूँसता रहा पर उनका पेट बढ़ता ही चला गया और अंत में एक दिन सीढियों से गिर कर बेटी की मौत की खबर ही मायके पहुँची.
आज वह छटपटाता है कि उसकी वह बेटी फिर से उसके पास लौट आये और वह चुन चुन कर उसकी सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी कर दे. पर वह अच्छी तरह जानता है कि अब यह असंभव है.
"लगा दूँ बाबूजी, एक हाथ में ही सही"  मेंहदीवाली की आवाज से विनय की तंद्रा टूटी. "हाँ हाँ लगा दो. 
एक हाथ में नहीं दोनों हाथों में. और हाँ, इससे भी अच्छी वाली हो तो वो लगाना." विनय ने डबडबायी आँखें पोंछते हुए कहा और बिटिया को आगे कर दिया.
दस रुपये का नोट



बस में छूट जाने के कारण, पुलिस ने उसका सामान, अपने कब्ज़े में ले लिया था। अब, किसी परिचित आदमी की ज़मानत के बाद ही, वह सामान उसे मिल सकता था।


“मेरी पत्नी सख़्त बीमार है। मेरा जल्दी घर पहुंचना बहुत ज़रूरी है होल्दार सा’ब !” उसने विनती की।

“भई, कह तो दिया, किसी जानकार आदमी को ढूंढकर ले आओ और ले जाओ अपना सामान।”

“मैं तो परदेसी आदमी हूं। सा’ब, दो सौ मील दूर के शहर में कौन मिलेगा मुझे जानने वाला !”

“यह हम नहीं जानते। देखो, यह तो कानूनी ख़ाना-पूर्ति है। बिना ख़ाना-पूर्ति किये हम सामानतुम्हें कैसे दे सकते हैं ?”
वह समझ नहीं पा रहा था कि ख़ाना-पूर्ति कैसे हो । 

कुछ सोचकर, उसने दस रुपये का नोट निकाला और चुपके-से, कॉन्स्टेबुल की ओर बढा दिया। नोट को जेब में खिसकाकर, उसे हल्की-सी डांट पिलाते हुए, कॉन्स्टेबुल ने कहा- “तुम शरीफ़ आदमी दिखते हो, इसलिए सामान ले जाने देता हूं। पर फिर ऐसी ग़लती मत करना, समझे !”   

दस के नोट ने, कॉन्स्टेबुल को ही, परिचित बना दिया था।

STORY


12 साल की मंफी से किसी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन परिवार में सभी चिंतित थे। उसे पता था कि उसके पिता की आंखों की रोशनी जा रही है और भाई की जिंदगी भी खतरे में है। 

पिता के लिए आंख और भाई के लिए किडनी का बंदोबस्त करना परिवार के बूते की बात नहीं थी। आखिर
उसने एक योजना बनाई जो उसके मुताबिक सभी समस्याओं का हल थी।

वह अपनी जिंदगी खत्म कर देगी। उसकी मौत से दहेज का पैसा तो बचेगा ही, उसके अंग भी पिता और भाई के काम आ जाएंगे। मंफी ने अपनी योजना पर अमल भी कर दिया, लेकिन मौत से पहले मां के नाम लिखा गया उसका खत परिवार वालों को तब मिला जब उसका अंतिम संस्कार हो चुका था।

छठी क्लास की छात्रा मंफी सरकार परिवार की समस्याओं को लेकर काफी परेशान थी। उसके नौवीं में पढ़ने वाले भाई मोनोजीत की एक किडनी खराब हो गई थी और दूसरी भी कमजोर हो रही थी।

दिहाडी मजदूर पिता मृदुल सरकार की आंखों की रोशनी कम होती चली जा रही थी। धंताला पंचायत के प्रधान तापस तरफदार बताते हैं,'परिवार ने लोकल एमएलए से संपर्क किया था। हमने फैसला किया कि उन्हें कुछ पैसा डोनेट करेंगे, लेकिन अचानक यह हादसा हो गया।

मंफी ने 17 जून की सुबह ही अपनी योजना के बारे में आठवीं में पढ़ने वाली बड़ी बहन मोनिका से बात की थी। लेकिन, मोनिका ने उसकी बात को हंसी में उड़ा दिया और स्कूल चली गई। पिता काम पर थे और मां रीता सरकार चावल लाने गई थी। खुद को अकेला पाकर मंफी ने कीटनाशक पी लिया। उसके बाद वह पिता से मिलने
दौड़ी।

जहर की बात पता चलते ही पिता उसे पास के दवाखाने ले गए। वहां से उसे लोकल अस्पताल भेज दिया गया। वहां भी हालत बिगड़ने पर मंफी को अनुलिया हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।+

मंफी का अंतिम संस्कार किए जाने के अगले दिन पिता मृदुल सरकार को मंफी के बिस्तर पर वह खत मिला जो मंफी ने मां के नाम लिखा था। खत में मंफी ने लिखा था कि उसकी आंखों और किडनी का इस्तेमाल करते हुए पिता और भाई का इलाज करवा लिया जाए। इस खत ने दुखी परिजनों का और बुरा हाल कर दिया। 

मां सदमे में हैं। पिता मृदुल सरकार रोते हुए कहते हैं,'हम उस  छोटी सी बच्ची की भावनाओं को समय रहते समझ नहीं पाए।'

Atone - प्रायश्चित

एक बार कुछ विद्यार्थी रसायन विज्ञानं प्रयोगशाला में कुछ प्रयोग कर रहे थे. सभी विद्यार्थी अपने अपने प्रयोगों में व्यस्त थे कि अचानक एक लड़के की परखनली से तेज बुलबुला उठा और उसकी छिट्कियाँ सामने प्रयोग कर रही लड़की की आँखों में चला गया.


पूरी प्रयोगशाला में हाहाकार मच गया. सभी खूब परेशांन हुए. आनन फानन में उस लड़की को अस्पताल पहुँचाया गया, वहाँ डाक्टरों ने बताया कि वो अपनी आँखें खो चुकी है. ये सुन कर उस लड़की के घर वालों ने उस लड़के को कोसना शुरू कर दिया और स्कूल वालों ने उस लड़के को स्कूल से निकाल दिया.

अब वो अंधी लड़की अपनी नीरस ज़िन्दगी बिता रही थी, जो शायद किसी की लापरवाही की वजह से वीरान सी हो गयी थी. अब उस लड़की की ज़िन्दगी में कोई भी रंग कोई मायने नहीं रखता था.

घर वाले भी वक़्त बेवक्त उस लड़के को कोसते रहते थे जिसने उनकी लड़की की ज़िन्दगी खराब कर दी थी. आज कल के ज़माने में तो किसी के सामने हूर परी भी बैठा दो तो भी लड़के वालों को उससे भी ज्यादा खूबसूरत चाहिए होती है.

फिर उस बिचारी की वीरान ज़िन्दगी में रंग भरने की बात सोच पाना भी असंभव सा था. खैर वक़्त बीतता गया और उस लड़की को उस वीराने की आदत हो गयी.

क्योंकि अब उसकी ज़िन्दगी में कही से भी उजाला आने की कोई गुंजाइश नहीं थी.
अचानक एक दिन एक बड़े इंजीनियर का रिश्ता उस अंधी लड़की के घर आया.

यही नहीं लड़का खुद उसके घरवालों से उसका हाथ मांगने अपने माँ बाप के साथ आया था. घर वाले मन ही मन बहुत खुश हो रहे थे कि बैठे बिठाये उन्हें अपनी अंधी लड़की के लिए लड़का मिल गया लेकिन लड़की इस बात से काफी दुखी थी. शायद इसलिए कि वो किसी की ज़िन्दगी खराब नहीं करना चाहती थी. इसलिए उसने लड़के को
अन्दर बुलाया और बोली कि मैं अंधी हूँ आपके घर का कोई काम मैं नहीं कर पाउंगी, आपको मुझसे कोई सुख नहीं मिल पायेगा, आप एक इंजीनियर हैं इसलिये आपको तो एक से बढ़कर एक लड़कियां मिल जायेंगी. आप प्लीज़ अपनी ज़िन्दगी खराब मत कीजिये.

इस पर वो लड़का आगे बढ़ा और घुटनों के बल बैठकर लड़की का हाथ पकड़कर बोला : प्लीज़ तुम इस शादी के लिए हाँ कहके मुझे मेरा प्रायश्चित कर लेने दो,

मैं वही हूँ जिसने तुम्हारी ज़िन्दगी वीरान की है और आज मैं प्रायश्चित करना चाहता हूँ. प्लीज़ मना मत करना.
ये सुन कर वो लड़की रोने लगती है, ये सोच कर नहीं कि उसकी ज़िन्दगी खराब करने वाला उससे शादी करना चाहता है. बल्कि ये सोच कर कि इस दुनिया में ऐसे लोग भी है जो अपनी गलती को स्वीकारना जानते हैं ।
MOTIVATIONAL STORY


हर सुबह की तरह आज भी अलार्म बजने से पहले मेरी नींद खुल गई।
क्योंकि मेरे लिए अलार्म का काम वो औरतें कर देती हैं जो खिड़की से सटे आम के पेड़ से गिरे हुए सूखे पत्ते बिछने आती हैं। उनके झाड़ू की लगातार खड़-खड़ मुझे बिस्तर छोड़ने को मजबूर कर देती है। उनके लिए खाना पकाने का यही एक साधन है। बरसात और जाड़े में उनके झाड़ू का काम खत्म हो जाता है। पर वो आती जरुर हैं। चाहे दो-चार ही लकड़ियां क्यों न मिले पर इस बगीचे से कुछ न कुछ ले कर ही जाती है। 11 बजते-बजते सभी औरतें अपने-अपने घर को चली जाती हैं। पर इतने समय तक वो सायद ही कुछ खाती होंगी। क्योंकि जब तक वो बगीचे में दिखायी देती हैं उनके मुँह में एक दातुन लटक रहा होता है। 

मैंने आँखे खोली और भगवान को धन्यवाद दिया फिर एक नयी सुबह दिखाने के लिए।
खिड़की के बाहर देखा तो एक बुढ़िया पते बिटोर रही थी। और वो गाय अभी तक आयी नहीं थी जो रोज इस वक़्त आ जाया करती थी अपनी हक़ की वो रोटी लेने जो रात को खाना खाने से पहले मैं खिड़की पर रख देता था। 

सोचा कभी आएगी तो खा लेगी मैंने रोटी खिड़की से निचे गिरा दी।
पर लगता है आज उस रोटी की ज्यादा जरुरत उस बुढ़िया को थी जो पत्ते बिटोरत-बिटोरते खिड़की के करीब आयी और वो रोटी उठा कर अपनी साड़ी के एक कोने में बांध ली।

कहते हैं इंसान की जरुरत ही उसके हैसियत के पन्ने खोल देती है। आज एक रोटी ने पल भर में उस बुढ़िया का पूरा वर्तमान दिखा दिया। मैंने डब्बे से कुछ बिस्कुट निकाले और उसे देते हुए कहा ....
"वो रोटी गाय के लिए छोड़ दीजिये।"
मुझे लगा उसे कुछ लज्जा होगी की मैंने उसकी चोरी पकड़ ली, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उसके चेहरे पर इस बात की कोई मलाल न था। उसने मेरे हाथों से बिस्कुट लिए और मैथिलि में ही कुछ ऐसा कह गई जिसकी मैंने कभी कल्पना भी न किया था.... 

"उ सब पत्तो खा लेई छै बउआ, बुढ़वा अखन तक किछ नै खैल हेतै।" (गाय तो पत्ते भी खा लेंगी, लेकिन बूढ़ा (उसका पति ) अभी तक कुछ नहीं खाया होगा ।

दोस्तों सुख में या दुःख में अगर कोई जिंदगी भर आपका साथ देगी तो है आपकी पत्नी। इसलिए जो स्थान आपकी पत्नी की है वो कभी किसी को ना दें। आपके बच्चे एक दिन आपसे घृणित हो सकते हैं पर यकीन मानिये आपकी पत्नी बुरे से बुरे वक़्त में भी आपके साथ रहेगी।""
Untouchable  - अछूत



एक छोटा बच्चा अपने काम वाली के घर रोटी खा कर आ जाता है।

माँ - बेटा तुमने काम वाली के घर पर रोटी क्यों खायी तुम अछूत हो गए, अब पूजा पाठ करवा कर तुम्हे पवित्र करवाना पड़ेगा,
बेटा- हस्ते हुए बोला माँ फिर तो घर के सभी लोग अछूत है।
माँ- हम केसे अछूत है।
बेटा- माँ मेने काम वाली के घर रोटी खायी, वो रोटी काम वाली ने बनाई थी में इस लिए अछूत हो गया न ?????
माँ - हा बेटा तुम छोटी जात वाले के घर रोटी खा कर आये हो इस लिए
बेटा - सही कहाँ माँ आप ने, आप सब लोग भी तो उसी काम वाली के हाथ का बना खाना रोज़ खाते हो तो आप सब भी अछूत हो गए।
सिर्फ घर बड़ा या छोटा होने से कोई अछूत नहीं होता, माँ मेरी नज़र में तो आप उस काम वाली से छोटी जात की लग रही हो आज,
जो इतनी छोटी सोच रखती हो, सोच बदलो देश खुद बदल जायेगा....!!
Childhood Memories - बचपन की यादें 
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एक दौर हुआ करता था, हमारे भी हुनर का जब झाड़ू की सींक से धनुष बना दिया करते थे।
तैयार होने के बाद राजा बाबू वाली फीलिंग तो तभी आती थी जब माँ नहला धुला पाउडर लगाने के बाद, ठुड्डी पकड़ के साइड से मांग निकाल के बाल बनाती थी..... !!!
‎बचपन‬ में सब लोग पूछा करते थे कि बड़े होकर क्या बनना है?
अब जाकर जवाब मिला....
"फिर से बच्चा बनना है..!!"
बचपन का जमाना होता था, खुशियों का खजाना होता था
चाहत चाँद को पाने की, दिल तितली का दीवाना होता था,
खबर न थी कोई सुबह की, न शामों का ठिकाना होता था,
थक हार के स्कूल से आना पर खेलने भी जाना होता था,
दादी की कहानी होती थी, परियों का फ़साना होता था,
बारिश में कागज की कश्ती थी हर मौसम सुहाना होता था,
हर खेल मैं साथी होते थे हर रिश्ता निभाना होता था,
पापा की वो डांट गलती पर मम्मी का मनाना होता था,
गम की जुबान ना होती थी ना जख्मो का पैमाना होता था,
रोने की वजह न होती थी न हंसने का बहाना होता था,
अब नहीं रही वो जिन्दगी जैसा बचपन का ज़माना होता था,
घूमते घूमते याद आ गए मुझे बचपन के वो पल।
आज की ही मस्ती होती थी,न चिंता थी खुदा जाने क्या होगा कल।।
रोते थे तो सर पे होता था माँ का साया ।
बचपन में सब के लाडले होते थे,भले ही बड़े होने पर पैसो ने बना दिया उनको पराया।।
ना वक़्त की कमी थी;ना थी खाने की चिंता।
अगर अच्छे संस्कार ना होते तो अभी इतना सूंदर भविष्य बनता।।
सुबह की वो भागा दौड़ी , जब माँ हमें छोड़ आती आंगनबाड़ी।
रोते थे वापस आके सोने के लिए मिलती माँ की फूलो से भरी आँचल वाली प्यारी से साड़ी।।
याद आते है बचपन की वो पल जब खेला करते थे सबके साथ लुका छिपी।
लूडो खेलते अपनी चाल के साथ की वो थोड़ी बईमानी।।
बचपन की वो आज़ादी ,वापस अगर आ जाए तो कुर्बान कर दू उसपे सारी ज़िंदगानी।।
याद आते है वो तलाब में नहाना ।
रात को किसी के भी घर पे खाना ।।
याद आते है...
मौसी की प्यारी सी फटकार।
नानी की ढेर सारी दुलार।।
मामा की गुस्सों का डर।
चाचा को जो होती हमारी फिकर।।
याद आ गया बचपन का वो यार ।
मस्ती से भरा बचपन का पिटारा।।
अपनों का सहारा ।
बचपन की सारी मस्तियाँ।
याद आ गया दोस्त के पैर में किया वो वो दर्दनाक experiment..  जिसकी याद रहेगी अब दिल में permanent..
याद है मुझे मेरा प्यार बचपन ।
याद है।।
याद है।।।
गेहूं 

बहुत पुरानी बात है ..एक गांव में एक किसानथा उसके तीन बेटे-बहुए थी.. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था , तब किसान के मन में तीर्थयात्रा पर जाने की बात आई मगर, किसान ने सोचा मेंअपनी सारी जिम्मेदारी किसे सौपु ...
बहु घर की लक्ष्मी होती है ...
अत: इनमे से ही किसी एकको चुनना चाहिए ...
लेकिन किसे ...?
उसने बहुत सोचा फिर उसने एक काम किया ,वो बाजार गया और वहाँ से तीन बोरी गेहूंलाया ...
उसने तीनो बहुओ को अपने पासबुलाया और कहा..
ये एक-एक बोरी गेहूं , मै तुमतीनो को दे रहा हूँ...
मुझे कुछ समय के लिए बाहर जाना है ..
तुम तीनो इसका जैसा चाहे उपयोग कर सकती हो...
कह कर वो चला गया..

अब उनमे से एक बहु ने सोचा ये गेहूं अपने पास रखकर मै क्या करुँगी...? 
कह कर उसने धीरे धीरे वो सारे गेहूं पक्षियों को खिला दिए... 

दूसरी बहु ने सोचा ससुर जी जब ये देकर गए है ..
तो जरुर ये कोई विशेष गेहूं होंगे .. 
मै इसको संभाल कर रख देती हूँ.. 
ऐसा कह करउसने वो गेहूं एक डब्बे में भर दिए...

तीसरी बहुने सोचा की इसका क्या किया जाए तब उसने अपने खेत के छोटे से टुकडे में उस गेहूं के बीज की बोवनी कर दी .... 
उसे समय-समय पर खाद - पानी दिया...
कुछ महीनो बाद किसान घर वापस लौटा तब उसने तीनो बहुओ को पास बुलाकर पूछा की उस गेहूं का क्या किया ...?
तब पहली वाली नेकहा कि मैंने तो सारे पक्षियों को खिला दिए', 'दूसरी वाली नेकहा मैंने सभाल कर रखे है पिताजी', लेकिन वो जब गेहूं का डिब्बा लेकर आई तो उस मे से सारे गेहूं खराब हो गए थे, उसमे कीड़े हो गए थे ...
अब तीसरी बारी आई तब उसने कहा' ससुरजी आपको वो गेहूं देखने के लिए मेरे साथचलना होगा ...
वो सबको साथ लेकर उस खेत में गयी जहां उसके द्वारा बोया गया गेहूं आज भरपूर फसल बन कर लहलहा रहा था....
इतनी सुन्दर गेहूं कि फसल देख कर किसानबहुत खुश हुआ और उसने उसे खूब आशीर्वाद दिए...

मोरल : जिंदगी में मौक़ा हमसभी को मिलता है, मुख्य बात है कि कैसे हमउस मौके का उपयोग करते है ..... 

यदि ठान लिया जाए, निश्चय दृढ़ हो और भावना अच्छी है तब थोड़ी सी समझदारी और परिश्रम से मिट्टी से भी सोना बनाया जा सकता है..

Friday, 18 March 2016

कड़ाके की सर्दी 

पारा शून्य डिगरी कश्मीर मे गश्त के दौरान सैनिको की टुकड़ी पहाड़ी रास्ते से गुजर रही थी, उनका कमाण्डर भी साथ था. रास्ता बेहद कठिन और अंधेंरा हो चुका था अब तो सैनिको का साहस भी जवाब दे रहा था. कुछ दुर चलते ही एक चाय की दुकान दिखी पर वो बंद थी. सब ने थकी आँखो से कमाण्डर की तरफ देखा. कमाण्डर को समझ आ गया की सब चाय पीना चाहते है. तभी कमाण्डर ने आदेश दिया हम कुछ समय के लिये यही आराम करेगें. और सब वही पर बैठ गऐ. फिर एक ने कहा यार अगर चाय मिल जाती इस ठंड मे तो मजा आ जाता. कमाण्डर समझ गऐ की सैनिक चाय पीने की इच्छा जता पर है. तभी कमाण्डर ने कहा पर ताला तो बंद है चाय कैसे पियेगें. साब जी ताला तोड़ देते है एक सैनिक ने कहा वैसे भी हम इन्ही लोगो की हिफाजत करते है. एक कप चाय तो बनती है इतना तो हमारा हक बनता है वैसे भी हमे कौन सी दुकान लुटनी है. इतना कह के ताला तोड़ दिया  गया. सब ने चाय बिस्किट खाऐ और चल पड़े अपने रस्ते. पर कमाण्डर ने जाते-जाते १००० का नोट टेबल पर  रख दिया! सुबह जब दुकानदार ने देखा ताला टुटा हुआ है तो बोला हे भगवान एक तो वैसे भी मेरे पास बच्चे के इलाज के पैसे नही है उपर से दुकान भी लुटवा दी. वह घबराता हुआ अंदर गया सामान तो सब ठीक था बस बिस्किट कम थे. हाथ सर पे रख के टेबल पे बैठा ही था की १००० का नोट दिखाई पडा वह खुशी से झूम उठा. जब सैनिको का जत्था वापिस आया तो उसी दुकान पे चाय के लिये रूके! दुकानदार ने गाना गाते हुऐ चाय सब को दी एक सैनिक ने सोचा रात को इसकी दुकान पर खूब दावत उडाई गई और ये ऐसे झूम रहा है जैसे कुछ हुआ ही नही यह सोच उसने दुकानदार से पुछ ही लिया चाचा बहुत खुश लग रहे क्या बात है हमे भी बताओ. इस पर दुकानदार हँसते हुऐ बोला क्या बताऊ साहेब कल रात मेरी दुकान पर भगवान आऐ थे यह सुनते ही सब की निगाहे दुकानदार पे जा टिकी, भगवान सैनिक ने बड़ी हैरानी से पुछा ! हॉ भगवान बात दरअसल यू है की मेरा बेटा बीमार है मेरे पास इलाज के पैसे नही थे . बहुत कोशीश करने के बावजुद कही से भी पैसो का इंतजाम न हुआ तो सोचा की क्यो ना दुकान का सामान बेच कर बेटे का इलाज करवा लूँ वैसे भी औलाद के बिना भी जी कर क्या करता मेरा इस दुनिया मे उसके सिवाय है कौन? आज जब मै दुकान पर आया तो ताला टुटा मीला पहले तो लगा की दुकान लुट गई है मेरे बेटे का क्या होगा फिर अंदर आया तो देखा भगवान ने बैठ कर चाय और बिस्किट खाऐ और १०००/- का नोट रख कर चले गऐ! शायद उनको पता था कि मुझे हजार रु की जरूरत है अपने बेटे के इलाज के लिये. दुकानदार की यह बात सुन के सब सैनिक कमाण्डर की तरफ देखने लगे और कमाण्डर की खामौश झुकी आँखो ने जैसे सब को आदेश दे दिया हो किसी का अटुट विश्वास भगवान पे बना रहने मे ही भलाई है अंत: सबनेअपनी-अपनी चाय खत्म की और अपने रस्ते चलते बने. बस इतनी सी थी ये कहानी दोस्तो कई बार हमारे द्वारा की गई छोटी सी मदद किसी की जिन्दगी मे बदलाव ला देती है. हम चाहे इसे ना महसूस कर पाऐ पर जिसकी मदद की जाती है वो हमेशा आभारी होता है और वैसे भी भगवान खुद नही आते मदद करने वो अपने प्यारे लोगो को यह जिम्मां दे देते है. इसलिये दोस्तो जहां मौका मिले मदद के लिये हाथ  बढ़ा दो क्योकि क्या पता किस काम के  लिये भगवान आप को चुन ले..
अजीब मुकदमा


कोर्ट में एक अजीब मुकदमा आया
एक सिपाही एक कुत्ते को बांध कर लाया
सिपाही ने जब कटघरे में आकर  कुत्ता खोला
कुत्ता रहा चुपचाप, मुँह से कुछ ना बोला..!
नुकीले दांतों में कुछ खून-सा नज़र आ रहा था
चुपचाप था कुत्ता, किसी से ना नजर मिला रहा था
फिर हुआ खड़ा एक वकील ,देने लगा दलील
बोला, इस जालिम के कर्मों से यहाँ मची तबाही है
इसके कामों को देख कर इन्सानियत घबराई है
ये क्रूर है, निर्दयी है, इसने तबाही मचाई है
दो दिन पहले जन्मी एक कन्या, अपने दाँतों से खाई है
अब ना देखो किसी की बाट
आदेश करके उतारो इसे मौत के घाट
जज की आँख हो गयी लाल
तूने क्यूँ खाई कन्या, जल्दी बोल डाल
तुझे बोलने का मौका नहीं देना चाहता
लेकिन मजबूरी है, अब तक तो तू फांसी पर लटका पाता
जज साहब, इसे जिन्दा मत रहने दो
कुत्ते का वकील बोला, लेकिन इसे कुछ कहने तो दो
फिर कुत्ते ने मुंह खोला ,और धीरे से बोला
हाँ, मैंने वो लड़की खायी है
अपनी कुत्तानियत निभाई है
कुत्ते का धर्म है ना दया दिखाना
माँस चाहे किसी का हो, देखते ही खा जाना
पर मैं दया-धर्म से दूर नही
खाई तो है, पर मेरा कसूर नही
मुझे याद है, जब वो लड़की छोरी कूड़े के ढेर में पाई थी
और कोई नही, उसकी माँ ही उसे फेंकने आई थी
जब मैं उस कन्या के गया पास
उसकी आँखों में देखा भोला विश्वास
जब वो मेरी जीभ देख कर मुस्काई थी
कुत्ता हूँ, पर उसने मेरे अन्दर इन्सानियत जगाई थी
मैंने सूंघ कर उसके कपड़े, वो घर खोजा था
जहाँ माँ उसकी थी, और बापू भी सोया था
मैंने भू-भू करके उसकी माँ जगाई
पूछा तू क्यों उस कन्या को फेंक कर आई
चल मेरे साथ, उसे लेकर आ
भूखी है वो, उसे अपना दूध पिला
माँ सुनते ही रोने लगी
अपने दुख सुनाने लगी
बोली, कैसे लाऊँ अपने कलेजे के टुकड़े को
तू सुन, तुझे बताती हूँ अपने दिल के दुखड़े को
मेरी सासू मारती है तानों की मार
मुझे ही पीटता है, मेरा भतार
बोलता है लङ़का पैदा कर हर बार
लङ़की पैदा करने की है सख्त मनाही
कहना है उनका कि कैसे जायेंगी ये सारी ब्याही
वंश की तो तूने काट दी बेल
जा खत्म कर दे इसका खेल
माँ हूँ, लेकिन थी मेरी लाचारी
इसलिए फेंक आई, अपनी बिटिया प्यारी
कुत्ते का गला भर गया
लेकिन बयान वो पूरे बोल गया....!
बोला, मैं फिर उल्टा आ गया
दिमाग पर मेरे धुआं सा छा गया
वो लड़की अपना, अंगूठा चूस रही थी
मुझे देखते ही हंसी, जैसे मेरी बाट में जग रही थी
कलेजे पर मैंने भी रख लिया था पत्थर
फिर भी काँप रहा था मैं थर-थर
मैं बोला, अरी बावली, जीकर क्या करेगी
यहाँ दूध नही, हर जगह तेरे लिए जहर है, पीकर क्या करेगी
हम कुत्तों को तो, करते हो बदनाम
परन्तु हमसे भी घिनौने, करते हो काम
जिन्दी लड़की को पेट में मरवाते हो
और खुद को इंसान कहलवाते हो
मेरे मन में, डर कर गयी उसकी मुस्कान
लेकिन मैंने इतना तो लिया था जान
जो समाज इससे नफरत करता है
कन्याहत्या जैसा घिनौना अपराध करता है
वहां से तो इसका जाना अच्छा
इसका तो मर जान अच्छा
तुम लटकाओ मुझे फांसी, चाहे मारो जूत्ते
लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते
लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते ..!!