Sunday, 20 March 2016

Childhood Memories - बचपन की यादें 
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एक दौर हुआ करता था, हमारे भी हुनर का जब झाड़ू की सींक से धनुष बना दिया करते थे।
तैयार होने के बाद राजा बाबू वाली फीलिंग तो तभी आती थी जब माँ नहला धुला पाउडर लगाने के बाद, ठुड्डी पकड़ के साइड से मांग निकाल के बाल बनाती थी..... !!!
‎बचपन‬ में सब लोग पूछा करते थे कि बड़े होकर क्या बनना है?
अब जाकर जवाब मिला....
"फिर से बच्चा बनना है..!!"
बचपन का जमाना होता था, खुशियों का खजाना होता था
चाहत चाँद को पाने की, दिल तितली का दीवाना होता था,
खबर न थी कोई सुबह की, न शामों का ठिकाना होता था,
थक हार के स्कूल से आना पर खेलने भी जाना होता था,
दादी की कहानी होती थी, परियों का फ़साना होता था,
बारिश में कागज की कश्ती थी हर मौसम सुहाना होता था,
हर खेल मैं साथी होते थे हर रिश्ता निभाना होता था,
पापा की वो डांट गलती पर मम्मी का मनाना होता था,
गम की जुबान ना होती थी ना जख्मो का पैमाना होता था,
रोने की वजह न होती थी न हंसने का बहाना होता था,
अब नहीं रही वो जिन्दगी जैसा बचपन का ज़माना होता था,
घूमते घूमते याद आ गए मुझे बचपन के वो पल।
आज की ही मस्ती होती थी,न चिंता थी खुदा जाने क्या होगा कल।।
रोते थे तो सर पे होता था माँ का साया ।
बचपन में सब के लाडले होते थे,भले ही बड़े होने पर पैसो ने बना दिया उनको पराया।।
ना वक़्त की कमी थी;ना थी खाने की चिंता।
अगर अच्छे संस्कार ना होते तो अभी इतना सूंदर भविष्य बनता।।
सुबह की वो भागा दौड़ी , जब माँ हमें छोड़ आती आंगनबाड़ी।
रोते थे वापस आके सोने के लिए मिलती माँ की फूलो से भरी आँचल वाली प्यारी से साड़ी।।
याद आते है बचपन की वो पल जब खेला करते थे सबके साथ लुका छिपी।
लूडो खेलते अपनी चाल के साथ की वो थोड़ी बईमानी।।
बचपन की वो आज़ादी ,वापस अगर आ जाए तो कुर्बान कर दू उसपे सारी ज़िंदगानी।।
याद आते है वो तलाब में नहाना ।
रात को किसी के भी घर पे खाना ।।
याद आते है...
मौसी की प्यारी सी फटकार।
नानी की ढेर सारी दुलार।।
मामा की गुस्सों का डर।
चाचा को जो होती हमारी फिकर।।
याद आ गया बचपन का वो यार ।
मस्ती से भरा बचपन का पिटारा।।
अपनों का सहारा ।
बचपन की सारी मस्तियाँ।
याद आ गया दोस्त के पैर में किया वो वो दर्दनाक experiment..  जिसकी याद रहेगी अब दिल में permanent..
याद है मुझे मेरा प्यार बचपन ।
याद है।।
याद है।।।

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