Monday, 29 February 2016

ईश्वर का निवास 

एक सन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर आये, दुकान मे अनेक छोटे-बड़े डिब्बे थे, एक डिब्बे की ओर इशारा करते हुए सन्यासी ने दुकानदार से पूछा, इसमे क्या है ? दुकानदारने कहा - इसमे नमक है ! सन्यासी ने फिर पूछा, इसके पास वाले मे क्या है ? दुकानदार ने कहा, इसमे हल्दी है !

इसी प्रकार सन्यासी पूछ्ते गए और दुकानदार बतलाता रहा, अंत मे पीछे रखे डिब्बे का नंबर आया, सन्यासी ने पूछा उस अंतिम डिब्बे मे क्या है? दुकानदार बोला, उसमे राम-राम है !

सन्यासी ने पूछा, यह राम-राम किस वस्तु का नाम है ! दुकानदार ने कहा - महात्मन ! और डिब्बों मे तो भिन्न-भिन्न वस्तुएं हैं, पर यह डिब्बा खाली है, हम खाली को खाली नही कहकर राम-राम कहते हैं !
संन्यासी की आंखें खुली की खुली रह गई ! ओह, तो खाली मे राम रहता है !

भरे हुए में राम को स्थान कहाँ ?

लोभ, लालच, ईर्ष्या, द्वेष और भली-बुरी बातों से जब दिल-दिमाग भरा रहेगा तो उसमें ईश्वर का वास कैसे होगा ?
राम यानी ईश्वर तो खाली याने साफ-सुथरे मन मे ही निवास करता है ! 

एक छोटी सी दुकान वाले ने सन्यासी को बहुत बड़ी बात समझा दी!
जय श्री राम

Tuesday, 23 February 2016

मालिस करना भी है  एक कला


मॉडर्न युग में हम मालिस का अर्थ स्पा से ही लगाने लगे हैं जबकि बचपन में मैं और मेरे पिताजी छत पर धुप में जा कर एक दुसरे की मालिस किया करते थे।
पूरे शरीर की मालिस स्वयं ही करनी चाहिए, बस पीठ की मालिस किसी और से ही कराई जानी चाहिए।
अब मैं आपको बताऊंगा कि मालिस किस अंग की कैसे और किस तेल से की जानी चाहिए। 
तेल का काम मुख्य तौर पर स्मूद हाथ चलने के लिए ही होता है और साथ ही रोमकूपों में चमड़ी में प्रवेश कर खुश्की दूर करने भर का होता है।
तेल में फूलों की सुगंध, आयुर्वेदिक जड़ी- बूंटी डाल कर उसे मेडिकेटेड बनाया जाता है और तेल की वैल्यू एड करता है और जो कि किसी ख़ास बीमारी के उपचार के लिए उपयुक्त है. अन्यथा मालिस के लिए सरसों का तेल बेस्ट है।
सिर की चम्पी के लिए नारियल तेल, उसमें ब्राम्ही-आंवला-भृंगराज आदि जड़ी डाल कर की गयी मालिस करने से बेहद लाभ होता है।
घुटनों के दर्द के लिए तिल के तेल की मालिस की जानी चाहिए. छोटे बच्चों और औरतों को जैतून का तेल बेहतर है।
दर्द से राहत के लिए सरसों के तेल में लहसुन उबाल कर मालिस करनी चाहिए।
सर की गरमी शांत करने के लिए देशी घी की मालिस अच्छी है।
सूर्य की किरणों से रचाया तेल भारी लाभदायक होता है।
शिरो धारा द्वारा भी कई उपचार किये जाते हैं।
मालिस के कुछ देर बाद गुनगुने पानी से नहाना चाहिए।


प्रत्येक अंग की मालिस कैसे करें,
यह एक महीना मालिस के लिए सर्वोत्तम है पूरे साल नीरोगी और एक्टिव रहने के लिए  सुबह की कुनकुनी धुप में कम से कम कपड़ों में लेट कर मालिस करने से आपकी नस-नाड़ी और मांस-पेसियां सबल होती है, रक्त संचार बढ़ता है, रोम कूप खुल जाते हैं, पुराने कोष झड जाती है सारे विजातीय द्रव्य बाहर निकल जाते हैं।
मालिस करने से भूख भी खुल कर लगती है, पूरे शरीर में प्रसन्नता की लहर दौड़ने लगती है।
सूर्य की किरणों विटामिन डी का सर्वोत्तम स्त्रोत है।
इसके पश्चात गुनगुने जल से शरीर रगड़ते हुए स्नान करने के बाद पूरा शरीर और दिमाग खुल जाता है
।

जरुरत

  • 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।
  • कुल 13 अधारणीय वेग हैं
  • 60 रोग केवल मांसाहार से होते है
  • 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
  • 80 रोग चाय पीने से होते हैं।
  • 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।
  • शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।
  • अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।
  •  ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ीआंत सिकुड़ जाती है।
  • मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।
  • भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
  • बाल रंगने वाले द्रव्यों(हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।
  • दूध(चाय) के साथ नमक(नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।
  • शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
  • गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।
  •  खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है।
  • खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।
  • भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
  • जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।
  • मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
  • पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय(टीबी) होने का डर रहता है।
  • चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।
  • तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।
  • मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।
  • अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है।
  • हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औशधियां हैं।
  • भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।
  • अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।
  • मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।
  • नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।
  • चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।
  • फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।
  • भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।

Body Massage Benefits

तेल मालिश  के लाभ


१. दुबले को मोटा और मोटे को दुबला बनाता है अर्थात तंदुरुस्त बोडी सेप में लाता है

२. शरीर में स्फूर्ति लाता है 

३. पाचन शक्ति बढाता है 

४. चरम रोग ठीक करता है 


५. ब्लड प्रेसर दुरुस्त करता है 


६. इम्मुनीटी पावर बढाता है 


७. शरीर के किसी भी भाग में दर्द ख़त्म करता है 


८. मानसिक शान्ति प्रदान करता है, चिडचिडापन दूर करता है 


९. नस-नाड़ियों को शक्ति देता है 


१०. पूरे शरीर को लचीला बनाता है 


११. कमर दर्द, गर्दन, घुटनों के दर्द, गठिया में बेहद लाभदायक 


१२. जवानी कायम रखते हुए झुर्रियों पर नियंत्रण 


१३. सेक्स पवार के लिए बेहतरीन 


१४. दिमाग ठंडा रखता है, सरदर्द चुटकियों में गायब 


१५. रोम छिद्र खुलने से शरीर के सारे टोक्सिंस बाहर निकाल फेंकता है 


१६. पूरा शरीर ख़ास कर चेहरा दमकने लगता है 


१७. विटामिन ऐ और डी का संवर्धन 


१८. ह्रदय और फेंफडों को शक्ति प्रदान करता है 


१९. वात दोष में तिल के तेल की मालिस वात दूर करता है. वात प्रधान मनुष्य को तो पूरे साल मालिस 

      अवश्य करनी चाहिए

२०. मालिस के साथ एक्युप्रेसर यानि सोने पे सुहागा 


२१. कई असाध्य रोगों के निदान में सहयोगी 

Monday, 22 February 2016

शहद भी बन सकता है जहर

  • चाय, कॉफी में शहद का उपयोग नहीं करना चाहिए। शहद का इनके साथ सेवन जहर के समान काम करता है।मांस, मछली के साथ शहद का सेवन जहर के समान है।शहद में घी या दूध बराबर मात्रा में हानिकारक है।
  • चीनी के साथ शहद मिलाना अमृत में विष मिलाने के समान है।
  • एक साथ अधिक मात्रा में शहद न लें। ऐसा करना नुकसानदायक होता है। शहद दिन में दो या तीन बार एक चम्मच लें।
  • तेल, मक्खन में शहद जहर के समान है।
  • शहद खाकर किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही हो तो नींबू का सेवन करें।
  • शहद  आग पर कभी न तपाएं।
 फायदे
  • रोजाना दो चम्मच शहद खाना बालों के लिए भी लाभदायक होता है, ये बालों को गिरने से रोकता है। स्किन को ग्लोइंग और प्रॉब्लम फ्री बनाता है।
  • सर्दियों में नियमित रूप से कम से कम दो चम्मच शहद का सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। शहद से शरीर स्वस्थ, सुंदर और सुडौल बनता हैं।
  • एक छोटी चम्मच त्रिफला और एक चम्मच शहद मिलाकर रात में सोते समय खाएं और ऊपर से दूध पी लें , पेट के सभी रोगों से छुटकारा मिल जाएगा ।
  • ठंड में रोजाना शहद खाने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। शहद का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। बूढ़े लोग जिनका पाचन तंत्र कमजोर हो चुका है, उनके लिये शहद बहुत फायदेमंद होता है।
  • शहद शुद्ध हो और एक एक बूंद दोनो आंखो मे डाली जाए तो आंखों की सफाई के साथ साथ रौशनी में फायदा होता है। ग्रामीण जनों की मान्यता है कि नेत्र ज्योति के लिए शहद एक बेहतर उपाय है।
  • शहद का नियमित सेवन निर्बल आमाशय व आंतों को मजबूत बनाता है।  दूध में बिना चीनी  डाले शहद घोलकर रात को पीने से दुबलापन दूर होकर शरीर सुडौल व बलशाली बनता है।
  • ये कैंसर को होने से रोकता है और साथ ही मोटापा घटाने के लिए भी उपयोग किया जाता है।
  • शहद याददाश्त बेहतर करने के लिए उत्तम है। शहद को छाछ के साथ लेने से भी याददाश्त बेहतर होती है।
  • शहद रक्त में हीमोग्लोबिन निर्माण में सहायक होता है और रक्त को शुद्ध करता है। यह खून के लाल अणु और हीमोग्लोबिन की संख्या में उचित तालमेल बैठाए रहता है। इसके नियमित सेवन से एनीमिया दूर हो जाता है। इसमें विटमिन बी और विटमिन सी तो होते ही हैं, इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी पाए जाते हैं, जो हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने में सहायक होते हैं।